
तहसील भानपुरा स्थित परमहंस आश्रम परोनिया में दो दिवसीय धार्मिक आयोजन में यथार्थ गीता का अखंड पाठ, संगीतमय सुंदरकांड और भंडारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और स्वामी रामरक्षा नंद जी महाराज के प्रवचन सुने। आयोजन के अंत में भक्तों ने प्रसाद और भंडारे का लाभ लेकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।
- परमहंस आश्रम परोनिया में यथार्थ गीता पाठ और सुंदरकांड में उमड़े श्रद्धालु
- स्वामी रामरक्षा नंद जी के प्रवचन से भक्त हुए भावविभोर
- भानपुरा क्षेत्र में दो दिवसीय धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में शामिल हुए भक्त
- यथार्थ गीता मानव मात्र का धर्मशास्त्र: स्वामी रामरक्षा नंद
राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’
भानपुरा। तहसील भानपुरा स्थित ॐ श्री परमहंस आश्रम परोनिया में दो दिवसीय धार्मिक आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में यथार्थ गीता का अखंड पाठ, संगीतमय सुंदरकांड, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजन के पहले दिन 28 फरवरी 2026 को यथार्थ गीता का पाठ किया गया तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। वहीं दूसरे दिन 1 मार्च 2026 को बाबुलदा की संगीत मंडली द्वारा संगीतमय सुंदरकांड और भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए गए, जिससे पूरा आश्रम भक्ति और उत्साह से सराबोर हो गया।
इस अवसर पर परमहंस आश्रम परोनिया के स्वामी श्री रामरक्षा नंद जी महाराज ने सत्संग और प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया। उन्होंने बताया कि यथार्थ गीता के प्रणेता विश्व गुरु परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ा नंद जी महाराज की कृपा से यह धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ है। स्वामी जी ने अपने प्रवचन में कहा कि यथार्थ गीता मानव मात्र का धर्मशास्त्र है, जो मत, मजहब, संप्रदाय और संगठनों से ऊपर उठकर समस्त मानवता के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिया, वही वेद, उपनिषद, ब्रह्मसूत्र, भागवत और महाभारत का सार है।
उन्होंने गीता के महत्व को बताते हुए कहा कि गीता का गहन अध्ययन और मनन मानव जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करता है। स्वामी जी ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे नियमित रूप से यथार्थ गीता का अध्ययन करें, जिससे जीवन में आध्यात्मिक ज्ञान और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। प्रवचन के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि मोक्ष प्राप्ति केवल सामान्य जीवनयापन से नहीं बल्कि भक्ति, साधना और आध्यात्मिक मार्ग के अनुसरण से संभव है।
यथार्थ गीता ऊंच-नीच, छुआछूत, भेदभाव, अमीर-गरीब या स्त्री-पुरुष के बीच किसी भी प्रकार का भेद नहीं करती, बल्कि सभी को समान रूप से आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। आयोजन के दौरान सभी श्रद्धालुओं ने एकाग्र मन से सत्संग सुना और बाद में भोजन भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। पूरे कार्यक्रम का समापन भक्तों के हर्ष और उल्लास के साथ हुआ।
ॐ श्री सद्गुरुदेव भगवान की जय।







