
चंपावत जिले में राशन कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी कराना 31 जनवरी तक अनिवार्य कर दिया गया है। तय समय तक प्रक्रिया पूरी न करने पर राशन बंद होने के साथ कार्ड रद्द किए जा सकते हैं।
- चंपावत में अब तक सिर्फ 59.90 प्रतिशत ई-केवाईसी
- खाद्य विभाग ने दी अंतिम चेतावनी
- अंत्योदय और पीएचएच कार्डधारकों पर संकट
- सस्ता गल्ला दुकानों पर बढ़ी उपभोक्ताओं की भीड़
चंपावत। सरकारी सस्ते गल्ले से राशन लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह खबर बेहद अहम है। चंपावत जिले में राशन कार्ड धारकों को 31 जनवरी 2026 तक ई-केवाईसी कराना अनिवार्य कर दिया गया है। तय समयसीमा तक ई-केवाईसी पूरी नहीं करने वाले उपभोक्ताओं का न केवल राशन रोका जा सकता है, बल्कि उनका राशन कार्ड भी निरस्त किया जा सकता है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, उत्तराखंड की ओर से जारी निर्देशों के अनुपालन में जिला पूर्ति विभाग, चंपावत ने यह सख्त निर्णय लिया है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करना सभी राशन कार्ड धारकों के लिए अनिवार्य है, चाहे वे किसी भी श्रेणी में आते हों। जिला पूर्ति अधिकारी प्रियंका भट्ट ने बताया कि जिले में अंत्योदय अन्न योजना के अंतर्गत 21,185 यूनिट, राज्य खाद्य योजना के तहत 96,277 यूनिट और प्राइमरी हाउस होल्ड (पीएचएच) श्रेणी में 1,44,794 यूनिट को खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है। इसके बावजूद अब तक केवल 59.90 प्रतिशत यूनिटों की ही ई-केवाईसी हो पाई है, जो विभाग के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित तिथि तक ई-केवाईसी नहीं कराई गई, तो संबंधित लाभार्थियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाला राशन बंद कर दिया जाएगा। साथ ही, ऐसे राशन कार्डों को रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। ई-केवाईसी की अंतिम तिथि नजदीक आने के कारण जिले की सस्ता गल्ला दुकानों पर उपभोक्ताओं की भीड़ बढ़ने लगी है। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि अंतिम दिन का इंतजार न करें और जल्द से जल्द अपने नजदीकी राशन डीलर के पास जाकर ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करा लें।
प्रशासन का कहना है कि यह कदम फर्जी और अपात्र लाभार्थियों को सिस्टम से बाहर करने और पात्र लोगों को समय पर राशन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। समय रहते ई-केवाईसी न कराने वाले उपभोक्ताओं को भविष्य में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।








