
रानीखेत में शिक्षिका के लापता पति का अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि उसने दो पत्नियों के बीच तनाव से बचने के लिए खुद ही गुमशुदगी का नाटक रचा। पुलिस ने उसे दिल्ली से बरामद कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
- लव ट्रायंगल में फंसा पति, पत्नी से झूठ छिपाने को रची गुमशुदगी की साजिश
- गुलदार हमले का नाटक, स्कूटी जंगल में छोड़ी और दोस्तों संग पहुंच गया दिल्ली
- रानीखेत शिक्षक पति केस का खुलासा, अपहरण नहीं खुद फरार हुआ था मनोज
- दो शादियों का तनाव बना फरारी की वजह, दिल्ली से बरामद हुआ पति
रानीखेत। रानीखेत में रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए एक शिक्षिका के पति की कहानी आखिरकार सामने आ गई। जिसे अपहरण और गुलदार हमले का शिकार माना जा रहा था, वह दरअसल अपनी ही रची साजिश का किरदार निकला। दो पत्नियों के बीच फंसे इस व्यक्ति ने पारिवारिक तनाव से बचने के लिए गुमशुदगी और अपहरण का पूरा ड्रामा रच डाला। शहर के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका के पति मनोज कुमार आठ दिसंबर को संदिग्ध हालात में लापता हो गया था।
उसकी स्कूटी खैरना-रानीखेत स्टेट हाईवे पर पन्याली जंगल में सड़क से नीचे गिरी मिली, जहां गुलदार की आवाजाही की आशंका रहती है। इससे यह संदेह और गहरा गया कि शायद वह किसी जंगली जानवर का शिकार हो गया हो। पुलिस और वन विभाग ने क्षेत्र में व्यापक सर्च अभियान चलाया। डॉग स्क्वायड बुलाया गया, सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए, लेकिन गुलदार हमले का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। जांच के दौरान पुलिस को कई कड़ियां जुड़ती नजर आईं, जिनसे मामला संदिग्ध होता चला गया।
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पुलिस जांच में सामने आया कि मनोज ने अपनी शिक्षिका पत्नी से नैनीताल में बैंक साक्षात्कार का बहाना बनाया था, जबकि ऐसा कोई साक्षात्कार था ही नहीं। वह नैनीताल पहुंचा ही नहीं, बल्कि रास्ते में योजना के तहत स्कूटी पन्याली जंगल में गिराकर दोस्तों की कार से दिल्ली निकल गया। मोबाइल फोन भी बंद कर दिया, ताकि सभी को लगे कि वह किसी अनहोनी का शिकार हो गया है। जांच आगे बढ़ी तो सर्विलांस की मदद से पुलिस को उसके दिल्ली में होने के सुराग मिले।
एसएसआइ कमाल हसन के नेतृत्व में पुलिस टीम दिल्ली पहुंची, जहां मनोज बार-बार ठिकाने बदल रहा था। आखिरकार दक्षिण दिल्ली के बिजवासन इलाके में उसे ढूंढ निकाला गया। पूछताछ में सामने आया कि वर्ष 2019 में मनोज ने परिजनों को बताए बिना एक मुस्लिम युवती से प्रेम विवाह किया था। इस बात से अनजान परिवार ने कुछ समय बाद उसका विधिवत विवाह एक शिक्षिका से करा दिया। दोनों पत्नियों से उसके एक-एक बच्चे हैं।
इसी दोहरे जीवन के दबाव और झूठ के बोझ ने उसे मानसिक तनाव में डाल दिया, जिससे बचने के लिए उसने यह पूरी साजिश रची। कोतवाल अशोक धनकड़ ने बताया कि मनोज को बरामद कर उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। आगे का पारिवारिक निर्णय स्वजन आपसी सहमति से करेंगे।





