
यह कविता होली के रंगों, पारिवारिक प्रेम और सामूहिक उत्सव की खुशियों को सरल और मधुर शब्दों में प्रस्तुत करती है। इसमें बच्चों की मासूम खुशी, परिवार का स्नेह और रंगों से भरी एकता का संदेश दिया गया है।
- रंगों में घुला प्यार
- खुशियों का रंगीन त्योहार
- होली का पारिवारिक उल्लास
- रंग, प्रेम और उत्सव
डॉ. प्रियंका सौरभ
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पापा हँसकर रंग लगाएँ,
नन्हे बच्चे खिलखिलाएँ।
लाल, पीला, नीला, हरा,
होली ने सबको जोड़ा ज़रा।
मम्मी, पापा साथ खड़े,
नन्हे बच्चे रंगों में पड़े।
नीला, पीला, हरा, गुलाबी,
होली लगती कितनी प्यारी।
मिलकर सब खुशियाँ मनाएँ,
प्यार के रंग सब पर छाएँ।
मिलकर गाएँ, नाचें सब,
रंगों से भर जाएँ अब।
होली आई खुशियाँ लाई,
प्यारी दुनिया रंगीन बनाई।
(डॉ. प्रियंका सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक हैं।)
डॉ. प्रियंका सौरभ
पीएचडी (राजनीति विज्ञान)
कवयित्री | सामाजिक चिंतक | स्तंभकार
उब्बा भवन, आर्यनगर, हिसार









