
अयोध्या। राम मंदिर में होने वाले भव्य ध्वजारोहण समारोह से पहले राजनीति और भावनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला, जब अयोध्या के सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कार्यक्रम के निमंत्रण न मिलने को लेकर अपना दर्द जाहिर किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराने वाले हैं—जो निर्माण कार्य पूर्ण होने का प्रतीक होगा। इस ऐतिहासिक आयोजन की तैयारियों के बीच सांसद का यह बयान राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।
अवधेश प्रसाद ने कहा कि वह प्रधानमंत्री के आगमन का स्वागत करते हैं, लेकिन यह भी जोड़ते हैं कि स्थानीय लोगों और विस्थापित परिवारों की समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री 25 तारीख को भगवान श्रीराम के मंदिर आ रहे हैं। मैं उनका स्वागत करता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि जिन लोगों के घर यहाँ उजड़े हैं, उन्हें पुनर्वास मिलेगा, जिन किसानों की जमीन ली गई है, उनके लिए उचित मुआवजा सुनिश्चित होगा और बेरोजगार नौजवानों को सरकारी नौकरियों का अवसर मिलेगा।”
लेकिन इसके साथ ही उन्होंने अपने प्रति उपेक्षा की भावना का जिक्र किया। सपा सांसद के अनुसार, “‘यहाँ जन्म लेने के बावजूद मुझे नहीं बुलाया गया। जनता ने मुझे जिताया है, तो मुझे कार्ड मिलना चाहिए था। बाहर के लोगों को बुलाया जा रहा है लेकिन स्थानीय लोगों को मौका नहीं मिला।’” उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें निमंत्रण मिलेगा तो वह नंगे पैर जाकर रामलला के दर्शन करेंगे।
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उनके इस बयान ने सवाल उठाए हैं कि क्या राम मंदिर के ऐतिहासिक आयोजन में राजनीतिक मतभेद और स्थानीय प्रतिनिधियों की अनदेखी भी शामिल है? यह भी कहा जा रहा है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बाहरी श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया गया है, लेकिन स्थानीय निवासियों की उपस्थिति सीमित है, जिसने जनता के बीच हल्की नाराजगी पैदा की है।
इस बीच, रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सोमवार सुबह से ही हजारों भक्त मंदिर परिसर पहुँच रहे हैं। शहर को लगभग 100 टन फूलों से सजाया गया है, और अयोध्या उत्सव की भव्यता से जगमगा उठी है। देश-विदेश से आए श्रद्धालु आगामी ध्वजारोहण समारोह को लेकर बेहद उत्साहित हैं। कर्नाटक से आए एक भक्त ने कहा, “अयोध्या की व्यवस्थाएँ बहुत अच्छी हैं। मोदी जी ने अयोध्या का बहुत विकास किया है। यह सब संभव इसलिए हुआ, क्योंकि वह देश के प्रधानमंत्री बने।”
इकबाल अंसारी जैसे प्रमुख चेहरे को भेजे गए निमंत्रण पर भी चर्चा जारी है, जिससे पता चलता है कि राम मंदिर का यह आयोजन केवल धार्मिक महत्व ही नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भी रखता है। ध्वजारोहण समारोह को लेकर अयोध्या में उत्साह चरम पर है, लेकिन इसके साथ ही स्थानीय प्रतिनिधियों और आम लोगों की भावनाओं की अनदेखी की बहस भी बढ़ती जा रही है।








