
केंद्र सरकार ने अखिल भारतीय पर्यटक यान परमिट नियमों में संशोधन करते हुए निजी पर्यटक वाहनों के संचालन पर नई शर्तें लागू की हैं। एक अप्रैल 2026 से वाहन को अपनी यात्रा होम स्टेट से ही शुरू करनी होगी और वह 60 दिनों से अधिक अन्य राज्य में नहीं रह सकेगा। परमिट की वैधता 12 से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी गई है।
- सरकार ने पर्यटक वाहनों के नियमों में किया संशोधन
- परमिट की अवधि 12 से बढ़ाकर 15 वर्ष
- होम स्टेट से यात्रा शुरू करना अनिवार्य
- टोल बकाया होने पर नहीं मिलेगा परमिट
देहरादून। निजी पर्यटक वाहनों के संचालन को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी ‘अखिल भारतीय पर्यटक यान (परमिट) संशोधन नियम, 2026’ एक अप्रैल 2026 से लागू होंगे। यह संशोधन भारत सरकार के स्तर पर अधिसूचित किए गए हैं और देशभर में प्रभावी होंगे। नए नियमों के तहत अब कोई भी निजी पर्यटक वाहन अपनी यात्रा अपने ‘होम स्टेट’ यानी जिस राज्य से परमिट जारी हुआ है, वहीं से शुरू करेगा।
इसके अलावा, कोई भी वाहन अपने गृह राज्य के बाहर लगातार 60 दिनों से अधिक नहीं रह सकेगा। इस प्रावधान का उद्देश्य परमिट प्रणाली को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाना बताया जा रहा है। परमिट से जुड़े अन्य प्रावधानों में भी बदलाव किए गए हैं। अब आवेदन करते समय यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित वाहन पर राष्ट्रीय राजमार्ग का कोई टोल शुल्क बकाया न हो। यदि टोल बकाया पाया गया तो परमिट जारी नहीं किया जाएगा।
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सरकार ने परमिट की वैधता अवधि को भी बढ़ा दिया है। पहले जहां परमिट 12 वर्ष के लिए मान्य था, अब इसे बढ़ाकर 15 वर्ष कर दिया गया है। साथ ही, व्यक्तिगत आवेदकों के लिए आधार संख्या और कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट पहचान संख्या (CIN) या जीएसटी नंबर देना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे यह सत्यापित किया जाएगा कि आवेदक का व्यवसाय उसी राज्य में संचालित है, जहां वाहन पंजीकृत है।
राजधानी देहरादून समेत विभिन्न शहरों से संचालित निजी पर्यटक वाहनों पर इन नियमों का सीधा असर पड़ेगा। परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार, नए प्रावधानों से परमिट व्यवस्था में एकरूपता आएगी, हालांकि कुछ ऑपरेटरों को संचालन मॉडल में बदलाव करना पड़ सकता है।








