
राजेश ध्यानी
उस गीत को
कैसे गांऊ मैं
जो गीत लिखा
ना गया मुझसे ,
उसको स्वर मैं दू
कहां से
जो ढूंढा ना गया मुझसे।
बेस का भी
अब ज्ञान नही
कंठ जो धींमा हो गया ,
बाज़े मे बेठा
थक गया
शायद ये भी
रूंठ गया।
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अब तो दिल से
ठन गयी
अपने ही गीत
सुनाऊंगा
मुझ पर क्या हैं
बीत रही ,
खुद से खुद को
सहलाऊंगा
अब अपने गीत
सुनाऊंगा।
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¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »राजेश ध्यानी “सागर”वरिष्ठ पत्रकार, कवि एवं लेखकAddress »144, लूनिया मोहल्ला, देहरादून (उत्तराखण्ड) | सचलभाष एवं व्हाट्सअप : 9837734449Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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