
सुनील कुमार माथुर
आप जो जगमगाते दीपकों की
जो रोशनी देख रहे हैं,
यह रोशनी कुम्हारों के आशीर्वाद,
उनके कठिन परिश्रम
और कड़ी मेहनत का ही परिणाम है।
जगमग-जगमग करते हुए
ये दीपक हर गली, मोहल्ले,
गांव और शहर में अपनी रोशनी फैलाकर,
अज्ञानता के अंधकार को दूर कर
ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं।
दीपावली का यह पावन अवसर
कुंभारों का प्रमुख त्यौहार है —
रोज़ी-रोटी कमाने का दिन।
कुंभारों के आशीर्वाद से ही
आज हमारे घरों में जगमगाते दीपक
घर की शोभा बढ़ा रहे हैं।
रंगोली के बीच जगमगाते ये दीपक
सभी के जीवन में
उमंग, उत्साह, प्रेम और स्नेह की
मिलनसारिता की बहार बहा रहे हैं।
दीपावली का यह पावन अवसर
हर घर को रोशन करे,
हर मन में अपार खुशियाँ भर दे,
प्रेम और स्नेह की भावना को बढ़ा दे,
टूटे दिलों को फिर से मिला दे।
दीपावली की इस पावन रोशनी में
हम अपने गिले-शिकवे भूलकर
एक नये जीवन की शुरुआत करें।
– सुनील कुमार माथुर
सदस्य, अणुव्रत लेखक मंच, जोधपुर, राजस्थान







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