साहित्य लहर
कविता : हे सूर्य भगवान रहम करो

सुनील कुमार माथुर
हे सूर्य भगवान ! रहम करों , रहम करों
जोधपुर शहर तो वैसे ही
सूर्यनगरी के नाम से जाना जाता हैं चूंकि
भीषण गर्मी का तांडव यहां देखा जाता हैं
पत्थरों से बने मकान वैसे ही तपते हैं और
ऊपर से तुम्हारा यह आग उगलना
कुछ भी समझ में नहीं आता हैं
हे सूर्य भगवान ! रहम करों , रहम करों
छतों पर सोने के लिए हवा नहीं है
छतों को ठंडा करने को पानी नहीं है
कूलर भरने को पानी नहीं है
छतों पर पानी की टंकियों में
पानी ऐसे उबल रहा हैं कि उनमें
चाय की पती , दूध व शक्कर डाल दो
गर्मा गर्म चाय तैयार है
हें सूर्य भगवान ! रहम करों , रहम करों
वर्षा को आने दीजिए और
गर्मी से राहत दिलाने में मदद कीजिए
हे सूर्य भगवान ! रहम करों , रहम करो
¤ प्रकाशन परिचय ¤
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From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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