
राजीव कुमार झा
शीशे का दिल
किसी दिन टूट जाता
आदमी फिर उससे
नफरत से भर जाता
कुछ भी कहां बता
पाता
कोई अकेला रास्ता
याद आता
किसी ने कुछ कहा
अब किसी को
वह क्या बताता
शीशे का टूटा दिल
राह में छितराता
सबके पैर में गड़ता
धूप पेड़ों पर से
मन की गलियों में
तब कहीं हंसती चली जाती
अरी सुंदरी
तुम शाम में जाते पहर
तब मुस्कुराती
नदी की चंचल बनी
अविराम धारा
रातभर झांकता
चांद इसमें
सुबह कड़ी धूप का
मारा
कोई एक दिल
अब राह में टूटा बेचारा
तुमने उसे कैसे संवारा
लहूलुहान उंगलियों की
पोरों से
तुमने मन का सुनहरा
कोई सहज चित्र
आकाश में टांका
मुस्कुराता सूरज
निकल आया
किसी को
वह क्या बताता
प्रेम के इस पहर में
धरती को भींगता
देखकर
बादल गीत गाता
मुस्कुराता
प्रेम की राह में
तुमको बुलाता.
[box type=”info” align=”alignleft” class=”” width=”100%”]
👉 देवभूमि समाचार के साथ सोशल मीडिया से जुड़े…
WhatsApp Group ::::
https://chat.whatsapp.com/La4ouNI66Gr0xicK6lsWWO
FacebookPage ::::
https://www.facebook.com/devbhoomisamacharofficialpage/
Linkedin ::::
https://www.linkedin.com/in/devbhoomisamachar/
Twitter ::::
https://twitter.com/devsamachar
YouTube ::::
https://www.youtube.com/channel/UCBtXbMgqdFOSQHizncrB87A
[/box]
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »राजीव कुमार झाकवि एवं लेखकAddress »इंदुपुर, पोस्ट बड़हिया, जिला लखीसराय (बिहार) | Mob : 6206756085Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
|---|







