
देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहन बसंती बेन और उनके बहनोई हंसमुखलाल ऋषिकेश और देहरादून के अपने निजी प्रवास के बाद उत्तराखंड से वापस लौट गए। पूरे प्रवास के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से खुद को पूरी तरह मीडिया से दूर रखा और किसी भी प्रकार की बातचीत, बयान या औपचारिक कार्यक्रम से विनम्रतापूर्वक परहेज किया। उनकी यह यात्रा व्यक्तिगत, पारिवारिक और धार्मिक गतिविधियों पर आधारित रही, जिसे वे पूर्णतः सादगी और शांति के साथ पूरा करना चाहती थीं।
सूत्रों के अनुसार, बसंती बेन का यह प्रवास किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं था, बल्कि परिवारिक कारणों और आध्यात्मिक शांति से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। इसी कारण उन्होंने अपनी यात्रा का अधिकांश समय निजी रूप से बिताया और किसी भी प्रकार की सार्वजनिक हलचल से दूरी बनाए रखी। इस दौरान नरेंद्र मोदी विचार मंच उत्तराखंड की टीम ने उनका हार्दिक स्वागत किया। स्वागत समारोह पूर्णतः पारंपरिक, गरिमापूर्ण और उत्तराखंड की सांस्कृतिक मर्यादाओं के अनुरूप आयोजित किया गया। बसंती बेन को गढ़वाल की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक पारंपरिक अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, वहीं हंसमुखलाल को उत्तराखंड के गौरव का प्रतीक गढ़वाली टोपी पहनाकर सत्कार किया गया।
सम्मान के इस अवसर पर मंच की ओर से उन्हें राज्य की वीरांगना तीलू रौतेली की स्मृति-प्रतिमा भी भेंट की गई, जो साहस, नारी-शक्ति और उत्तराखंड की ऐतिहासिक परंपराओं का प्रतीक मानी जाती है। स्थानीय टीम के सदस्यों ने बताया कि यह सम्मान राज्य की मेहमान-नवाजी, संस्कृति और परंपरा को अभिव्यक्त करने का माध्यम है, जिसे सादगीपूर्वक निभाया गया। पूरे प्रवास के दौरान किसी प्रकार का औपचारिक सार्वजनिक आयोजन नहीं हुआ। बसंती बेन और उनके परिवार की इच्छा के अनुरूप उन्हें पूरी निजता प्रदान की गई। यह यात्रा बिना किसी भीड़-भाड़, मीडिया कवरेज या राजनीतिक गतिविधि के शांतिपूर्वक संपन्न हुई, जिसने उत्तराखंड की शांत, सहज और सम्मानजनक संस्कृति को एक बार फिर प्रदर्शित किया।
स्थानीय लोगों और स्वागतकर्ताओं ने बताया कि बसंती बेन उत्तराखंड की सादगी, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण से प्रभावित दिखीं। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा, परंतु पूरे प्रवास के दौरान उनका विनम्र और सरल व्यवहार लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। उनके लौटने के साथ ही उनका यह निजी उत्तराखंड दौरा सफलतापूर्वक और बिना किसी औपचारिक हलचल के समाप्त हो गया।





