
देहरादून में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पानी के नमूनों की जांच और निगरानी को पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। अब पीसीबी स्वयं सैंपल एकत्र करेगा और उनकी ट्रैकिंग के लिए मोबाइल एप्लिकेशन सिस्टम तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही लैब को मान्यता दिलाने और एसओपी लागू करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लैब को मिलेगी NABL मान्यता
- अब हर सैंपल की होगी डिजिटल निगरानी
- पानी की जांच प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता
- PCB की बोर्ड बैठक में मोबाइल ऐप प्रस्ताव पास
देहरादून: उत्तराखंड में जल गुणवत्ता की निगरानी को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) ने महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है। अब बोर्ड स्वयं पानी के नमूने (सैंपल) एकत्र करेगा और उनकी पूरी प्रक्रिया की निगरानी आधुनिक तकनीक के माध्यम से की जाएगी। इस नई व्यवस्था के तहत सैंपल संग्रहण से लेकर जांच और रिपोर्टिंग तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसके लिए एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन सिस्टम विकसित किया जाएगा, जो नमूनों की जांच से जुड़े आंकड़ों की रियल-टाइम ट्रैकिंग सुनिश्चित करेगा।
इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या लापरवाही पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी। वर्तमान में पीसीबी के क्षेत्रीय कार्यालयों की प्रयोगशालाओं को मान्यता प्राप्त नहीं है। इस स्थिति को सुधारने के लिए बोर्ड ने राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) से मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्णय लिया है। इसके साथ ही लैब संचालन के लिए मानक प्रचलन पद्धति (SOP) भी तैयार की जाएगी, जिससे जांच प्रक्रिया एकरूप और विश्वसनीय बन सके।
पीसीबी नियमित रूप से नदियों और अन्य जल स्रोतों से नमूने एकत्र कर उनकी गुणवत्ता की जांच करता है। अब तक यह प्रक्रिया आंशिक रूप से मैनुअल थी, जिससे निगरानी और डेटा प्रबंधन में चुनौतियां आती थीं। नई डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद सैंपल संग्रहण की लोकेशन, समय, जांच की स्थिति और परिणाम सभी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इस प्रस्ताव को हाल ही में आयोजित पीसीबी की बोर्ड बैठक में मंजूरी भी मिल चुकी है।
अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से जल प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस सुधार देखने को मिलेंगे। कुल मिलाकर, यह पहल उत्तराखंड में जल गुणवत्ता प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जिससे भविष्य में पर्यावरणीय निगरानी अधिक सटीक, पारदर्शी और जवाबदेह बन सकेगी।





