
यह कविता परीक्षा के समय बच्चों को अनुशासन, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत का संदेश देती है। इसमें डर को छोड़कर हिम्मत से आगे बढ़ने और सपनों को साकार करने की प्रेरणा दी गई है। सरल शब्दों में रची गई यह रचना बच्चों के लिए सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है।
- मेहनत से खिलता भविष्य
- बच्चों के लिए प्रेरक परीक्षा गीत
- आत्मविश्वास की ओर कदम
- पढ़ाई, अनुशासन और सपनों की उड़ान
डॉ. प्रियंका सौरभ
परीक्षा की घड़ी आई।
सोचो बच्चों करो पढ़ाई।।
सुबह-सुबह उठकर पढ़ना।
मन को बिल्कुल नहीं टालना।।
किताब हमारी सच्ची दोस्त।
ज्ञान दिलाए हर दिन रोज़।।
डर को दूर भगाओ अब।
हिम्मत से तुम लिखना सब।।
मेहनत से जो आगे बढ़ता।
सपनों का सूरज वही चढ़ता।।
माँ-पापा का मान बढ़ाओ।
शिक्षक जी को गर्व दिलाओ।।
आज जो मन से पढ़ जाए।
कल मुस्कान खुद आए।।
परीक्षा की घड़ी आई।
सोचो बच्चों करो पढ़ाई।।
अनुशासन को अपनाएँ।
आत्मविश्वास को गले लगाएँ।।
गिरें अगर तो डर न जाएँ।
फिर से आगे बढ़ते जाएँ।।
आज की मेहनत रंग लाए।
कल का भविष्य रच जाए।।
सपनों को सच कर जाएँ।
पूरी लगन से पढ़ जाएँ।।
(डॉ. प्रियंका सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक हैं।)









