
(कार्यालय संवाददाता)
जोधपुर। चित्रकार कु. अंशुल माथुर ने कहा कि चित्रकार और साहित्यकार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। चित्रकार अपने चित्रों के माध्यम से और साहित्यकार अपनी लेखनी के जरिए अपनी बात जन-जन तक पहुँचाते हैं और समाज में रचनात्मक विचारों को फैलाकर अहम भूमिका निभाते हैं। यह उद्गार उन्होंने साहित्यकार सुनील कुमार माथुर को उनकी पांच दशक की साहित्य साधना पूर्ण होने पर स्कैच चित्र भेंट करते हुए व्यक्त किए।
इस अवसर पर साहित्यकार सुनील कुमार माथुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि जो व्यक्ति अपने अनुभवों से सबक लेकर आगे बढ़ता है, उसकी तरक्की की रफ्तार तेज होती है। जीवन में विफलता मिलना आम बात है, लेकिन उसे दिल से नहीं लगाना चाहिए। साहित्यकार माथुर ने कहा कि जब कोई चित्रकार या कार्टूनिस्ट किसी साहित्यकार को कोई उपहार देता है, तो उस उपहार की कीमत निश्चित तौर पर बढ़ जाती है। मुफ्त में मिलने वाली चीज़ों की कीमत आधी हो जाती है, जबकि मेहनत से अर्जित चीज़ की कीमत अनमोल होती है।
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कु. अंशुल माथुर ने स्कैच से पूर्व भगवान कृष्ण, शिव जी, लक्ष्मी जी, गणेश जी के अलावा मदर्स डे और फ़ादर्स डे पर भी आकर्षक चित्रकारी कर अपनी कला का प्रदर्शन किया है। जब भी उन्हें समय मिलता है, वह चित्रकारी कर समाज के सामने अपनी अनूठी कला प्रस्तुत करती हैं। उनका कहना है कि रचनात्मक कार्य करते रहने से इंसान सदैव तनावमुक्त रहता है।









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