बापू के नाम खुला खत : कानूनों में लचीलापन

सुनील कुमार माथुर
आदरणीय बापू, सादर चरणस्पर्श…
बापू आज देश आजादी के 75 वर्ष पर अमृत महोत्सव मना रहा हैं और देश भर में भक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम आयोजित किये जा रहें है वहीं दूसरी ओर समाज में न जानें कहां से सिरफिरे व शरारती तत्व आकर जमा हो गये हैं जो हर दिन कोई न कोई अनहोनी कर राष्ट्र को कमजोर करने का प्रयास कर रहें है और हम मात्र इन आपराधिक गतिविधियों पर घडियाली आंसू बहाकर इतिश्री कर लेते हैं ।
एक ओर हम अपने आपको सभ्य समाज का सभ्य नागरिक कहते जा रहें है वहीं दूसरी ओर इंसानियत शर्मसार हो रही हैं हाल ही में राजस्थान के अलवर जिले में मूक – बधिर लडकी के साथ घटित घठना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया । हमारे ही देश में देवी स्वरूपा नारी पर आये दिन अत्याचार बढते ही जा रहें है । ये घटनाएं मानवता को कलंकित कर रही हैं और अलवर जिले की यह घटना कोई पहली घटना नहीं है ऐसी घटनाएं देश भर में हर रोज घटित हो रही हैं आखिर क्यों ?
क्या हमारे कानूनों में अधिक लचीलापन है कि अपराधियों के हित में जैसा चाहें वैसे कानून को तोङा मरोडा जा रहा हैं या फिर लचीलेपन के नाम पर अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा हैं । ऐसी जघन्य आपराधिक घटनाओं के बावजूद भी अपराधी पकड से बाहर क्यों और पकड में आते हैं तो उन्हें कठोर दंड क्यों नहीं दिया जाता हैं ।
आज दिन तक अपराधियों को कठोर दंड नहीं दिया गया यहीं वजह है कि आज आपराधिक घटनाओं की बाढ सी आ गयी हैं और हमारे कानून कायदों ये आपराधिक तत्व धज्जियां उडा रहें है और हम मूक दर्शक बने बैठे हैं । कठोर दंड के आभाव में अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहें है और वे कानून कायदों को ढेगा दिखा रहें है ।
हें बापू ! आप तो अहिंसा के पुजारी हैं इसलिए आपको इस धरती पर एक बार फिर से जन्म लेना होगा और इन राष्ट्र विरोधी ताकतों को सबक सिखाना होगा । बापू आपकी लाठी में ऐसी शक्ति हैं जो भले ही आवाज न करे पर राष्ट्र विरोधी ताकतों को सही सबक सीखा सकती हैं ।
बापू ! जिस लाठी ने हमें अंग्रेजी दासता से मुक्त करा दिया वो भला क्या इन शरारती तत्वों को सही राह नहीं दिखा सकती । बापू आपकी लाठी में प्रेम , दया , करूणा , ममता व वात्सल्य की भावना का एक अनोखा मिश्रण है जो बिगडी को भी आसानी से संवार सकती हैं ।
बापू ! आपकी लाठी के समक्ष तो अंग्रेज भी नहीं टिक पाये तो फिर ये शरारती तत्व क्या चीज हैं । बापू ! आप राष्ट्र की मुख्यधारा से कटे लोगों को फिर से राष्ट्र की मुख्यधारा से जोडिये । उन्हें सही राह दिखाईये । उन्हें आदर्श राष्ट्र का आदर्श नागरिक बनायें ।
बापू ! एक बार से इस धरती पर फिर से जन्म लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों को नये सिरे से स्थापित कीजिए । कानून की खामियों को दूर कीजिए । राष्ट्र को सुदृढ़ व संगठित कीजिए । स्वस्थ मस्तिष्क – स्वस्थ समाज की स्थापना कीजिए । स्वच्छ गली , मौहल्ला , गांव , शहर , समाज व राष्ट्र की स्थापना कीजिए । जिन सिरफिरों के दिमाग में अपराध रूपी गंदगी जमा हो चुकी हैं ऊनके दिमाग की गंदगी को साफ सुथरा कीजिए ताकि एक नये भारत का नव निर्माण हो सकें एवं फिर देश में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटनाएं घटित न हो।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
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From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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