हे भगवान सिर्फ तेरा सहारा : तीन अनाथ बच्चे
तीन मासूम बच्चे हुए अनाथ कोई नहीं है सहारा, दरवाज़े-दरवाजे जाकर पाल रहे पेट

15 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई जनप्रतिनिधि इन मासूम बच्चों अनाथ की सुधि लेने नहीं पहुंची
अर्जुन केशरी
एक सच्ची घटना जो आप को हिला देने वाली है मामला गया जिला के बाराचट्टी प्रखंड से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर झाझ पंचायत के भेड़िया गांव की है। जहां पर तीन मासूम बच्चे अनाथ हो गए जिसे कोई सहारा नहीं है।
मिली जानकारी के मुताबिक भेड़िया गांव निवासी बलराम मांझी की मृत्यु ठीक आज से 15 दिन पहले हो गई है और लगभग 3 साल पहले इनकी पत्नी कबूतरी देवी की मृत्यु हो गई है तीन छोटे-छोटे मासूम बच्चे हैं, जो बड़ा सागर कुमार करीब 8 वर्ष दूसरा रंजन कुमार लगभग 6 वर्ष और तीसरा नीतीश कुमार जो लगभग 4 वर्ष का है।
आसपास के ग्रामीणों से पता चला कि इस तीनों बच्चे का इस दुनिया में अब कोई नहीं है ना माता ना पिता ना चाचा ना चाची ना ही इसके नानी घर के कोई है बेचारे मासूम को अभी तक यह भी नहीं पता है कि उसके माता-पिता का प्रेम उसके छत्रछाया से उठ गया है बेचारे मासूम को देखकर लगता यह है कि कैसे होगी इनका परिवरिश।
पिता की मृत्यु के बाद 15 दिन से वह दरवाजे दरवाजे जाकर किसी प्रकार अपने पेट की जलन को बुझा रहे है परंतु यह कब तक चलता रहेगा यह सब कब तक खिलाते रहेंगे आसपास के लोग।कब तक?
कोई प्रतिनिधि या समाजसेवी तक इसे देखने नहीं आए हैं। आसपास लोगों का कहना है कि अगर इन्हें कोई अनाथ आश्रम में जगह मिल जाती तो शायद जीवन बच जाय। बता दें कि ये अनाथ बच्चे खाना तो दरवाजे दरवाजे जाकर जो मिले उसे खा लेते पर सोने और रहने के लिए भी घर नहीं है।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
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From »अर्जुन केशरीवरिष्ठ संवाददाताAddress »बाराचट्टी, गया (बिहार)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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