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भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में अगले वर्ष से महिला कैडेट भी पासिंग आउट परेड में पुरुष कैडेटों के साथ कदमताल करेंगी। यह निर्णय सेना में लैंगिक समानता, संरचनात्मक सुधार और नेतृत्व के नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।
- आइएमए में पहली बार दिखाई देंगी महिला कैडेट, 93 साल बाद बदलेगी परंपरा
- महिला अधिकारियों की नई राह: अब ओटीए के साथ आइएमए भी बनेगा प्रशिक्षण केंद्र
- महिला कैडेट के लिए बैरक, मेडिकल और स्पोर्ट्स सुविधाएं अपग्रेड
- सेना के इतिहास में मोड़: 2026 से POP में संयुक्त कदमताल की शुरुआत
देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) अगले वर्ष अपनी पासिंग आउट परेड में एक ऐतिहासिक परिवर्तन के मुहाने पर खड़ी है। अब तक 93 वर्षों से केवल पुरुष कैडेटों के प्रशिक्षण का गढ़ रही आइएमए में वर्ष 2026 से महिला कैडेट भी परेड में शामिल होंगी और पुरुषों के साथ कदमताल करती दिखाई देंगी। इस साल 13 दिसंबर को होने वाली पासिंग आउट परेड वही अंतिम अवसर होगा, जब ड्रिल स्क्वायर पर केवल पुरुष कैडेटों की ही मौजूदगी दिखेगी। इसी के साथ एक ऐसी सैन्य परंपरा का समापन हो रहा है, जिसे भारत की सेना ने लगभग एक शताब्दी तक निभाया।
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आइएमए में महिला कैडेटों की एंट्री को भारतीय सेना में लैंगिक समानता के विस्तार और सैन्य संस्कृति में व्यापक सुधार की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब तक सेना में महिला अधिकारी चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) से कमीशन प्राप्त करती रही हैं, लेकिन आइएमए—जिसे देश का सबसे कठोर व प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण केंद्र कहा जाता है—में महिलाओं का प्रवेश एक बड़े ढांचागत बदलाव से कम नहीं है। इस निर्णय को लागू करने के लिए अकादमी में बुनियादी ढांचे, आवासीय परिसर, सुरक्षा मानकों और प्रशिक्षण प्रणाली में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं।
आइएमए परिसर में महिला कैडेटों के लिए अलग से बनाए गए बैरक, ऑफिसर मेस, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और मेडिकल सुविधाओं को अपग्रेड किया गया है। प्रशिक्षकों को भी विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं, जिनमें प्रशिक्षण के दौरान लैंगिक पक्षपात को खत्म करने और एक समान मानकों पर आधारित प्रशिक्षण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यह परिवर्तन केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि इससे कार्य संस्कृति, नेतृत्व के अवसर, क्षमता-विकास और संगठनात्मक सोच में भी बड़ा बदलाव आएगा।
सेना द्वारा लाए जा रहे इस सुधार की एक और महत्वपूर्ण कड़ी दिसंबर 2023 का निर्णय था, जब आइएमए ने ‘जेंटलमैन कैडेट’ के स्थान पर ‘ऑफिसर कैडेट’ शब्द का इस्तेमाल शुरू किया। यह बदलाव सेना की उस भविष्यवादी दृष्टि को दर्शाता है, जिसमें लिंग आधारित पहचान के बजाय क्षमता, अनुशासन और नेतृत्व को प्राथमिकता दी जा रही है।
महिला कैडेटों के प्रशिक्षण का यह नया अध्याय अगस्त 2022 से शुरू हुआ था, जब 19 महिला कैडेटों का प्रथम बैच राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में शामिल हुआ। तीन वर्षों की कठोर सैन्य शिक्षा के बाद मई 2025 में इनमें से 18 कैडेट स्नातक हुईं। उन्हीं में से आठ उत्कृष्ट कैडेटों को आइएमए में प्रवेश मिला और 15 जुलाई 2025 को वे पहली बार देहरादून स्थित अकादमी में रिपोर्टिंग कर इतिहास का हिस्सा बनीं। अब ये आठ कैडेट आइएमए में एक वर्ष का कठोर और विशिष्ट सैन्य प्रशिक्षण ले रही हैं, जिसके बाद वे 2026 की पासिंग आउट परेड में पहली बार पुरुष कैडेटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कदमताल करेंगी।
देशभर के सैन्य विशेषज्ञों और पूर्व सैनिकों का मानना है कि यह परिवर्तन भारतीय सेना को अधिक विविध, सक्षम और आधुनिक बनाते हुए वैश्विक सैन्य संरचनाओं की पंक्ति में खड़ा करेगा, जहां महिला और पुरुष अधिकारी एक ही मंच पर समान अवसर के साथ अग्रसर होते हैं। आइएमए की यह अगली परेड केवल एक परंपरा का अंत ही नहीं, बल्कि भविष्य की सेना की पहली झलक भी होगी, जिसमें नेतृत्व और समानता—दोनों नए रूप में खिलेंगे।





