
यह कविता नववर्ष के अवसर पर नशा त्याग, शुद्ध आचरण और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का प्रेरक संदेश देती है। कवि समाज को नशामुक्त, नैतिक और इंसानियत से भरा जीवन जीने के लिए संकल्प लेने का आह्वान करता है।
- नववर्ष का संकल्प
- नशामुक्त जीवन का आह्वान
- स्वस्थ समाज की ओर कदम
- अच्छे कर्मों की शुरुआत
गणपत लाल उदय
अजमेर, राजस्थान
आओ मिलकर जश्न मनाएँ आज फिर से हम,
ऐसी चीज़ों का त्याग करें जिनमें लगती शर्म।
मांस, मछली, मदिरा, मुर्गा इन सबको छोड़ें हम,
एक वर्ष फिर बीत गया, कर लो ये अच्छे कर्म।।
भूल जाना दुःख-भरी वो रातें, कर लेना हजम,
गगन तारे छू जाना करके परमेश्वर के भजन।
बीड़ी-सिगरेट, गांजा-भांग, ड्रग्स से बनाना दूरी,
नूतन साल से छोड़ दो इनको अब सभी जन।।
नए साल की शुभकामनाएँ और देते हैं बधाई,
धोखे, जाल, झूठ से न करना कोई यह कमाई।
शुद्ध सभी को बेचना है इन दुकानों से मिठाई,
रखो साथियों इंसानियत, कर लो थोड़ी भलाई।।
नया जोश व नया उल्लास रखना है सभी को,
अनसुलझी पहेली है तो सुलझा लेना उसको।
गुटखा, जर्दा, पान, सुपारी, हुक्का भी छोड़ देना,
ऐसा कोई नशा करते हो तो छोड़ देना सबको।।
नव वर्ष में ना कर देना कोई किसी की विदाई,
आत्मा से हम बोल रहे, ऐसे हैं अनेकों कसाई।
परिवर्तन तो होता रहता, न रखना कोई लड़ाई,
उत्तम व्यवहार बनाएँ, रखें यह मेरी सिखलाई।।








