
यह रचना नव वर्ष 2026 के स्वागत में प्रेम, ज्ञान, एकता और मानवता के मूल्यों को अपनाने का प्रेरक संदेश देती है। कवि ने भारत की एकता, भाईचारे और समृद्ध भविष्य की कामना को काव्यात्मक भावों में अभिव्यक्त किया है।
- नव आशाओं और एकता का संदेश: नव वर्ष गीत
- ज्ञान, मानवता और भाईचारे का नववर्षीय आह्वान
- भारत भूमि के लिए नव वर्ष की मंगल कामना
- नव वर्ष 2026: प्रेम, प्रकाश और समृद्धि की कामना
भुवन बिष्ट, रानीखेत (उत्तराखंड)
नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन,
कर रहा है जग जन-जन वंदन।
प्रेम भाव का दीप जलायें,
हो हर मन में अब उजियारा।
सारे जगत में अब बन जाये,
अपनी धरा यह भारत प्यारा।
हर मन में जले ज्ञान का दीपक,
मिटे जगत से सदा अंधकार।
यह नूतन वर्ष लेकर आये,
नव आशाओं का संचार।।
स्वागत में कर रहे कीर्ति गायन,
प्रफुल्लित धरा है हर तन मन।
नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन,
कर रहा है जग जन-जन वंदन।
बँधे एकता सूत्र में हम सब,
नव वर्ष में मिले यही वरदान।
भारत भू की एकता जग में,
बन जाये हम सबकी पहचान।।
मिट जाये हर जन मन से अब,
यह राग द्वेष का मैल सारा।
किरणें फैले पावनता की,
हर आँगन खुशियों की धारा।
बहती समय की धारा यह,
आया दो हजार छब्बीस सन् ।
नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन,
कर रहा है जग जन-जन वंदन।
अब अन्तः मन की जगे चेतना,
हर मन बहे मानवता की धार।
आओ भाईचारा हम सदा फैलायें,
पावन बने हर जन मन संसार।।
यह नूतन वर्ष लेकर आये,
नव आशाओं का संचार।
नई सोच व नई उमंग से,
अब मानवता की हो जयकार।
खुशहाली लेकर आये वर्ष,
समृद्धि बसे हर जन अंतर्मन।।
नव वर्ष तुम्हारा है अभिनंदन,
कर रहा है जग जन-जन वंदन।









