
यह कविता नारी के साहस, ममता, त्याग और शक्ति का सुंदर चित्रण करती है। इसमें बताया गया है कि नारी केवल सृजन की आधारशिला ही नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध खड़ी होने वाली दुर्गा स्वरूपा भी है। समाज में नारी का सम्मान और सशक्तिकरण ही उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
- नारी : ममता, शक्ति और साहस की प्रतीक
- नारी सम्मान से ही उज्ज्वल समाज
- दुर्गा स्वरूपा नारी का गौरव
- नारी शक्ति का अमिट संदेश
आशी प्रतिभा
स्वतंत्र लेखिका, भारत
नारी साहस ही तो जग में नारी सम्मान
नहीं अबला नारी, नारी शक्ति की पहचान।।
ममता की धारा है नारी, दृढ़ता की मिसाल
उसकी हिम्मत के आगे हर मुश्किल बेहाल।।
कभी माँ बनकर जग को जीवन देने वाली
सृजनकर्ता है नारी, इस जग का आधार।।
कभी बेटी बनकर हर आँगन को महकाती,
बहन रूप में स्नेह के दीप सदा ही जलाती।।
देकर आशीष सदा ममता लुटाने वाली स्त्री,
पत्नी बनकर जीवन पथ को सरल बनाती।।
अन्याय की आँधी से संसार में छाए बदहाली,
नारी ही दुर्गा बन जाए, रण में कहलाए काली।।
कलम उठाए तो नारी नया ही इतिहास रचाए,
अपने साहस से हर बंधन से नारी ने मुक्ति पाई।।
जिस घर में नारी का सम्मान पुष्प खिला रहेगा,
वहाँ सुख का हर दीप सदा ही प्रज्वलित होता रहेगा।
इस समाज में नारी सशक्त हो, हो प्रतिभाशाली,
तभी भविष्य भी उज्ज्वल होगा, गरिमामय होगी नारी।।









