
यह कविता एक नन्हे बच्चे की मासूमियत, खुशी और खेल-खेल में सीखने की भावना को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती है। छोटी-सी बाइक पर सवारी करते हुए उसका आनंद और परिवार की खुशी इसमें झलकती है।
- नन्हे कदमों की मस्ती भरी दुनिया
- बचपन की मुस्कान और सवारी
- छोटे बच्चे की बड़ी खुशियाँ
- खेल-खेल में सीखता बचपन
डॉ. प्रियंका सौरभ
अरे देखो, नन्हा बच्चा आया,
छोटी-सी बाइक वो लाया।
हाथों से हैंडल पकड़ता जाए,
धीरे-धीरे आगे बढ़ता जाए।
टुन-टुन करती उसकी सवारी,
लगती सबको बहुत ही प्यारी।
हँसता-गाता चलता जाए,
सबको देख वो मुस्काए।
नन्हे पाँव पैडल चलाते,
मस्ती में वो गीत सुनाते।
मम्मी-पापा खुश हो जाते,
उसको देख खूब मुस्कुराते।
गली-गली वो घूमने जाए,
दोस्तों संग खेल दिखाए।
आँधी आए या बारिश प्यारी,
मस्ती उसकी रहे हमेशा जारी।
खेल-खेल में सीखे बात,
खुश रहना है सबसे खास।
टुन-टुन करके वो मुस्काया,
अरे देखो, नन्हा बच्चा आया।
✍ डॉ. प्रियंका सौरभ
📍 उब्बा भवन, आर्यनगर, हिसार (हरियाणा)
(डॉ. प्रियंका सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक हैं।)








