
नंदानगर (चमोली) | चमोली जिले के नंदानगर क्षेत्र में आई भीषण आपदा ने पूरे इलाके को मातम में डुबो दिया है। विनसर पहाड़ी से भयंकर मलबे का सैलाब इतना तेज़ी से उतरा कि देखते ही देखते हंसते-खेलते गांव उजाड़ हो गए। शुक्रवार को कुंतरी लगा फाली गांव से पांच शव और बरामद किए गए। इस आपदा में लापता हुए 10 लोगों में से अब तक सात की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति को जीवित निकाला गया है। धुर्मा गांव के दो लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है।
विनसर पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित महादेव मंदिर में लोग सुख-समृद्धि की कामना करने जाते थे, लेकिन उसी पहाड़ी से मिट्टी और पत्थरों का सैलाब ऐसा फूटा कि पूरे इलाके को तबाह कर गया। नंदानगर के आठ किलोमीटर के दायरे में कुदरत के कहर के गहरे निशान हैं—तहस-नहस मकान, टूटी सड़कें, उजड़े खेत-खलिहान, बर्बाद पेयजल और बिजली व्यवस्था।
सेरा गांव : जहां मकानों की जगह अब बह रहा गदेरा
मोक्ष गदेरे के किनारे बसा सेरा गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। यहां लगभग 30 परिवार रहते थे। आपदा की रात उफान पर आए गदेरे ने 8 मकान बहा दिए। कई घरों के आंगन से होकर अब गदेरा बह रहा है। महिलाओं ने गांव के प्रधान के घर पर इकट्ठा होकर अपना दुख साझा किया। ग्राम प्रधान रेखा देवी ने बताया कि लोग अपने छोटे बच्चों को लेकर बदहवासी में सड़क की ओर भागे। उनका कहना है—“सिर्फ मकान नहीं, हमारी पूरी जिंदगी मलबे में दब गई है। अब कैसे आगे बढ़ें, समझ नहीं आ रहा।”
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इस गांव में 35 परिवार रहते थे, जिनमें से 15 मकान मलबे में दब गए। गुरुवार को कुंवर सिंह को मलबे से जिंदा निकाला गया, लेकिन उनकी पत्नी और जुड़वा बेटे—विकास और विशाल—लापता थे। शुक्रवार को एनडीआरएफ टीम ने कई घंटे तक लिंटर तोड़कर शव निकाले। मां और दोनों बेटों का शव देखते ही गांव में मातम पसर गया। महिलाओं की आंखें नम हो गईं, वे कह रही थीं—“ये तो राम-लखन की जोड़ी थी, मासूमों ने किसका क्या बिगाड़ा था?”
संगीता देवी पर टूटा दुखों का पहाड़
इसी गांव की संगीता देवी तीन साल पहले पति को खो चुकी थीं। मेहनत-मजदूरी से घर बनाकर किसी तरह बच्चों का पालन कर रही थीं। आपदा में उनका घर, मवेशी, गौशाला सब मलबे में दब गए। अब उनके पास न घर है, न सहारा। वे फूट-फूटकर रोते हुए कह रही थीं—“सीमेंट के कट्टे पीठ पर ढोकर, पत्थर तोड़कर मकान बनाया था, भगवान ने वह भी छीन लिया। अब बच्चों को कहां लेकर जाऊं?”
नंदानगर क्षेत्र की तबाही बृहस्पतिवार की रात बादल फटने के बाद शुरू हुई थी। भूस्खलन और मलबे ने नंदानगर बाजार के ऊपर बने छह मकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। धुर्मा और सैंती लगा कुंतरी गांव भी भारी नुकसान झेल रहे हैं। कई सड़कें मलबे से बंद हैं, जिससे राहत कार्य कठिन हो गया है। प्रशासन हेलिकॉप्टर से खाद्यान्न किट बांट रहा है। शुक्रवार को नोडल अधिकारी जेपी तिवारी और उरेड़ा के परियोजना अधिकारी ने प्रभावित परिवारों का हाल जाना और नुकसान का आकलन किया।
उजड़े सपनों के बीच उम्मीद की तलाश
दिन में लोग अपने उजड़े घरों को देखने पहुंचते हैं, टूटी दीवारों और खेतों को देखकर रोते-रोते यादों में खो जाते हैं। रात को राहत शिविरों में सोने जाते हैं। बच्चों के स्कूल के प्रमाणपत्र, बैंक पासबुक, पैसे और महत्वपूर्ण दस्तावेज मलबे में दब चुके हैं। इन गांवों में अब सिर्फ दर्द और खामोशी की कहानियां हैं।





