
मुंबई के बीएमसी मेयर पद का फैसला 22 जनवरी को आरक्षण लॉटरी से तय होगा, जिससे भाजपा और शिंदे सेना के बीच राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, जिससे सियासी समीकरण और उलझ गए हैं।
- 22 जनवरी को आरक्षण लॉटरी, बीएमसी मेयर पद पर सस्पेंस
- फडणवीस के लौटने के बाद साफ होगी तस्वीर
- शिंदे सेना ने पार्षदों को होटल में ठहराया, बढ़ी अटकलें
- संजय राउत का दावा– भाजपा को मेयर नहीं चाहते शिंदे के पार्षद
- 29 महानगरों में मेयर पद के लिए एक साथ लॉटरी
मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के सबसे ताकतवर राजनीतिक पदों में शामिल बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के महापौर पद को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। शहरी विकास विभाग ने घोषणा की है कि 22 जनवरी (गुरुवार) को आरक्षण लॉटरी के जरिए मेयर पद का निर्धारण किया जाएगा। इसके साथ ही भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच अनिश्चितता और खींचतान बढ़ गई है। राज्य के 29 महानगरों में मेयर पद के लिए एक साथ आरक्षण लॉटरी निकाली जाएगी।
यह प्रक्रिया सुबह 11 बजे मंत्रालय के परिषद कक्ष में आयोजित होगी। आरक्षण की घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस वर्ग के लिए मेयर पद आरक्षित होगा और उसी आधार पर राजनीतिक दल अपने उम्मीदवार उतार सकेंगे। इस बीच, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) द्वारा भाजपा को समर्थन देने की संभावनाओं की चर्चा ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। माना जा रहा है कि यदि भाजपा को शिंदे सेना से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला, तो उद्धव ठाकरे “किंगमेकर” की भूमिका में आ सकते हैं।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस समय विश्व आर्थिक मंच की बैठक में भाग लेने के लिए दावोस गए हुए हैं और उनके 24 जनवरी को लौटने के बाद ही अंतिम राजनीतिक तस्वीर साफ होने की संभावना है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि मेयर पद को लेकर निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाएगा। राजनीतिक तापमान उस समय और बढ़ गया जब शिंदे सेना ने अपने पार्षदों को बांद्रा के एक पांच सितारा होटल में ठहराया।
पार्टी ने इसे संवाद और मार्गदर्शन कार्यक्रम बताया, लेकिन विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इसे दलबदल रोकने और एकजुटता बनाए रखने की रणनीति मान रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने दावा किया कि शिंदे गुट के कई पार्षद मुंबई में भाजपा का मेयर नहीं चाहते। उन्होंने उपमुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि अगला मेयर शिवसेना से ही होना चाहिए। राउत ने यह भी याद दिलाया कि अब तक शिवसेना मुंबई को 23 मेयर दे चुकी है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए फडणवीस ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि “ईश्वर की इच्छा” के कई अर्थ हो सकते हैं, और मजाकिया अंदाज में जोड़ा कि उन्हें नहीं पता राउत किस भगवान की बात कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें “देवभाऊ” भी कहा जाता है। कुल मिलाकर, बीएमसी मेयर पद की दौड़ अब सिर्फ संख्याबल तक सीमित नहीं रही, बल्कि आरक्षण, गठबंधन और रणनीतिक समर्थन इस सियासी मुकाबले को और भी रोचक बना रहे हैं। 22 जनवरी की लॉटरी के बाद ही यह तय हो पाएगा कि मुंबई की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी।







