
अल्मोड़ा। बदलती जीवनशैली और तकनीकी निर्भरता ने पति-पत्नी के रिश्तों में नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। ऊधम सिंह नगर में स्थिति यह है कि मोबाइल फोन, मायके की दखलंदाजी और किसी तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी वैवाहिक जीवन की सबसे बड़ी समस्याएं बन चुकी हैं। जिले के महिला सेल में बीते आठ महीनों में ऐसे 491 मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें मोबाइल, बेवफाई या पारिवारिक हस्तक्षेप वैवाहिक कलह की मुख्य वजह बने हैं।
महिला सेल की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग हर दिन औसतन दो शिकायतें पति-पत्नी के बीच बढ़ते विवादों को लेकर दर्ज हो रही हैं। इनमें से कई मामले ऐसे हैं, जहाँ पत्नी के मोबाइल पर अधिक समय बिताने, घर की बातें मायके में बताने और पति के किसी अन्य महिला से संबंध रखने जैसी बातें सामने आई हैं। इन मुद्दों ने वैवाहिक जीवन में दरारें डाल दी हैं और कई परिवार टूटने की कगार पर पहुँच गए हैं।
महिला सेल प्रभारी मंजू पांडे के अनुसार, शिकायत मिलने पर पुलिस दोनों पक्षों को काउंसलिंग के लिए बुलाती है और तीन चरणों में बातचीत के बाद निर्णय तक पहुँचती है। अब तक 143 मामलों में काउंसलिंग के माध्यम से समझौता हो चुका है, जबकि 123 मामलों को कोर्ट में ट्रांसफर किया गया है। वहीं, 27 मामलों में पक्षकारों ने आगे कार्रवाई से इनकार कर दिया और 39 प्रकरण अभी लंबित हैं।
महिला सेल में सामने आए मामलों में एक नई प्रवृत्ति यह भी देखी गई कि नवविवाहित महिलाएँ नौकरी करने की इच्छा रखती हैं, लेकिन ससुराल पक्ष का विरोध उन्हें मायके लौटने पर मजबूर कर देता है। लगभग 100 मामलों में ऐसा पाया गया कि विवाह के एक से पाँच वर्ष बाद नवविवाहिताएँ नौकरी के मुद्दे पर ससुराल छोड़ चुकी थीं। दूसरी ओर, 50 ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें 25 साल का वैवाहिक जीवन गुजारने के बाद पति-पत्नी अलग हो गए। इन मामलों में तीसरे व्यक्ति के दखल और एक-दूसरे पर अविश्वास रिश्तों के टूटने की जड़ साबित हुए।
महिला सेल के रिकॉर्ड बताते हैं कि मोबाइल फोन पर अत्यधिक समय बिताना, मायके में हस्तक्षेप, और पति या पत्नी का किसी और से जुड़ाव — ये तीन कारण सबसे अधिक विवाद पैदा कर रहे हैं। कई पत्नियाँ दिनभर मोबाइल में व्यस्त रहती हैं और ससुराल की बात मायके में साझा करती हैं, जबकि कुछ पति कार्यस्थल या सोशल मीडिया के जरिए किसी अन्य महिला से संपर्क में रहते हैं।
महिला सेल प्रभारी मंजू पांडे का कहना है कि “आज रिश्तों को तोड़ने में सबसे बड़ी भूमिका मोबाइल, वो (तीसरे व्यक्ति) और मायके की दखलंदाजी की है। यदि पति-पत्नी आपसी संवाद बनाए रखें और डिजिटल सीमाएं तय करें, तो कई परिवार टूटने से बच सकते हैं।”
यह आंकड़े आधुनिक समाज के उस दर्दनाक सत्य को उजागर करते हैं, जहाँ तकनीक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन न बन पाने से पारिवारिक संबंध बिखर रहे हैं। संवाद, विश्वास और मर्यादा की कमी रिश्तों को खोखला बना रही है — और ऊधम सिंह नगर के ये आँकड़े देशभर में एक चेतावनी के रूप में देखे जा रहे हैं।








