
देश-विदेश से गांव लौटे प्रवासी उत्तराखंडी अपने अनुभवों के दम पर स्वरोजगार अपनाकर नई कामयाबी की कहानी लिख रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में 27 देशों से लौटे 169 प्रवासियों समेत 6282 लोगों ने रिवर्स पलायन कर प्रदेश को नई दिशा दी है।
- विदेशों से लौटे प्रवासियों ने गांव में शुरू किए आर्थिक उपक्रम
- कृषि, पर्यटन और पशुपालन में बढ़ी रिवर्स पलायन की भागीदारी
- हर जिले में होगी प्रवासी पंचायत, सरकार करेगी समस्याओं पर मंथन
- स्वरोजगार से गांवों में रोकी जा रही पलायन की धारा
देहरादून। रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में वर्षों पहले गांव छोड़कर देश-विदेश गए प्रवासी उत्तराखंडी अब वापस लौटकर अपने पैतृक गांवों में नई कामयाबी की इबारत लिख रहे हैं। रिवर्स पलायन की इस सकारात्मक पहल ने न केवल गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, बल्कि स्थानीय लोगों में भी स्वरोजगार के प्रति नई उम्मीद जगाई है।
उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग की रिवर्स पलायन रिपोर्ट-2025 के अनुसार, बीते पांच वर्षों में प्रदेश के 13 जिलों में कुल 6282 प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। इनमें 169 प्रवासी 27 विभिन्न देशों से वापस आए हैं, जबकि 4769 लोग देश के अन्य राज्यों और 1127 लोग प्रदेश के भीतर ही दूसरे जिलों से अपने मूल गांवों में लौटे हैं। विदेशों से लौटने वालों में टिहरी जिले के प्रवासियों की संख्या सबसे अधिक रही है।
विदेशों और महानगरों में काम कर चुके इन प्रवासियों के पास रोजगार और कारोबार का व्यापक अनुभव था। गांव लौटने के बाद उन्होंने सरकार की स्वरोजगार योजनाओं का लाभ उठाते हुए अपने अनुभव के आधार पर आर्थिक गतिविधियां शुरू कीं। आंकड़ों के अनुसार, रिवर्स पलायन करने वाले 39 प्रतिशत प्रवासियों ने कृषि और बागवानी को अपनाया। वहीं 21 प्रतिशत ने पर्यटन गतिविधियों, होम-स्टे और ट्रैकिंग जैसे क्षेत्रों में कदम रखा। इसके अलावा 18 प्रतिशत ने पशुपालन, जबकि छह प्रतिशत ने दुकान, रेस्टोरेंट और मसाला उद्योग जैसे छोटे व्यवसाय शुरू किए।
इन प्रवासियों की सफलता का असर अब गांवों में साफ दिखाई देने लगा है। स्वरोजगार के माध्यम से वे न केवल खुद आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि स्थानीय युवाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। उत्तरकाशी जिले में लौटे कुछ प्रवासी मोटे अनाजों की ऑनलाइन मार्केटिंग कर रहे हैं, जिससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है।
रिवर्स पलायन को और अधिक प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस वर्ष हर जिले में प्रवासी पंचायत आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग इस योजना पर काम कर रहा है। प्रवासी पंचायतों में गांव लौटे प्रवासियों की सफलता की कहानियों के साथ-साथ उनकी समस्याओं और सुझावों पर भी चर्चा की जाएगी, ताकि नीतियों को और प्रभावी बनाया जा सके।
उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एस.एस. नेगी का कहना है कि गांव लौटे प्रवासियों के अनुभव प्रदेश के लिए एक बड़ी पूंजी हैं। आने वाले समय में रिवर्स पलायन को और बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ें और पलायन की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लग सके। रिवर्स पलायन की यह लहर उत्तराखंड के गांवों को फिर से आबाद करने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।





