
यह लेख बताता है कि जीवन में सफलता का आधार मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प है, न कि किस्मत। असफलता को अवसर मानकर आगे बढ़ना और आत्मनिर्भर बनना ही सच्ची प्रगति का मार्ग है।
- किस्मत नहीं, मेहनत पर भरोसा करें
- सफलता का असली रास्ता: परिश्रम
- आत्मनिर्भरता और मेहनत का महत्व
- असफलता से सफलता तक की यात्रा
सुनील कुमार माथुर
समय बड़ा बलवान है। अतः मेहनत पर भरोसा कीजिए। मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती है। मगर अफसोस इस बात का है कि लोग मेहनत तो करते नहीं हैं और फिर किस्मत को दोष देते हैं। इसलिए किस्मत को दोष देने से पहले अपनी मेहनत पर भरोसा कीजिए। आज का इंसान इतना स्वार्थी हो गया है कि वह खुद तो मेहनत करता नहीं है और दूसरों के भरोसे रहता है, और जब कोई उसका कार्य किसी कारण से करने से मना कर देता है, तो फिर देखिए वह कैसे मुँह फुलाता है। अतः जहाँ तक हो सके, खुद का काम खुद कीजिए और दूसरों पर पूरी तरह से निर्भर रहना छोड़ दीजिए। अगर कोई काम नहीं आता है और उस काम की बार-बार जरूरत पड़ती है, तो वह काम पहले प्राथमिकता के साथ सीखिए, ताकि दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े और काम भी समय पर पूरा हो जाए। इसलिए किस्मत को दोष देने से पहले मेहनत पर भरोसा करना सीखें। इतना ही नहीं, अपनी हर असफलता को अपनी ताकत बनाने का प्रयास करें।
जीवन में सपने देखना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन सपने ऐसे देखो जिन्हें आप धरातल पर साकार कर सकें। कभी भी अपने आपको कमजोर न समझें। बस जो सपना देखा है, उसे साकार करने का आप में जज्बा होना चाहिए। काम के प्रति लगन व निष्ठा होनी चाहिए। याद रखिए, कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है। बस काम करने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए। हर असफलता हमें एक नया अवसर व मौका देती है, ताकि हम नए उत्साह और उमंग के साथ उसे फिर से कर सकें एवं सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ सकें। अतः असफलता मिलने पर तनिक भी न घबराएँ।
हमेशा अपने इरादे बुलंद रखें और खुद पर भरोसा रखें। क्योंकि जब भी आप कुछ नया करने वाले होते हैं, तो सबसे पहले आपका मजाक आपके अपने ही उड़ाते हैं। इसलिए उस तरफ तनिक भी ध्यान न दें और अपने लक्ष्य की ओर निर्बाध रूप से एक-एक कदम बढ़ाते रहिए। सफलता आपके कदम अवश्य ही चूमेगी। जो सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते हैं, वे अवश्य ही अपनी मंजिल को प्राप्त करते हैं और समाज के समक्ष एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
इस नश्वर संसार में चाटुकारों की कोई कमी नहीं है। वे हर समय अपने स्वार्थ की सिद्धि में लगे रहते हैं। इसलिए जीवन में कुछ पाना है, तरक्की करनी है, तो सदैव इन चाटुकारों से दूर रहिए। ये लोग तभी तक आपके साथ हैं, जब तक इनका आपसे स्वार्थ पूरा होता है। दूसरे शब्दों में कहें तो ये लोग “मुँह में राम, बगल में छुरी” वाली नीति पर चलते हैं। इसलिए इनसे बचकर चलें व अपना लक्ष्य हासिल करें।
सुनील कुमार माथुर
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार
33 वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुआँ, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान








Right