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मेरठ पुलिस ने प्रादेशिक सेना भर्ती में धांधली की तैयारी कर रहे सॉल्वर गैंग के दो सरगनों को धर दबोचा। आरोपियों से अवैध हथियार, कार और कई अहम सुराग मिले हैं, जिनसे गैंग के बड़े नेटवर्क के खुलासे की संभावना है।
- मेरठ पुलिस की बड़ी कार्रवाई: सॉल्वर गैंग के दो मुख्य सदस्य दबोचे
- प्रादेशिक सेना भर्ती में सेंधमारी से पहले ही गैंग पकड़ा गया
- सरकारी भर्तियों में सक्रिय सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश
- अवैध हथियार और कार के साथ दो शातिर आरोपी गिरफ्तार
मेरठ। मेडिकल थाना क्षेत्र में जागृति विहार के पास पुलिस ने शनिवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सॉल्वर गैंग के दो शातिर सरगनाओं को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में पीलीभीत के पूरनपुर निवासी रिंकू और बुलंदशहर के सलेमपुर निवासी कपिल चौधरी शामिल हैं। दोनों आरोपी प्रादेशिक सेना की चल रही भर्ती प्रक्रिया में सेंधमारी करने की नीयत से मेरठ पहुंचे थे, लेकिन पुलिस की पूर्व सूचना, सतर्कता और सटीक घेराबंदी के चलते उन्हें मौके पर ही दबोच लिया गया। पुलिस ने इनके कब्जे से एक तमंचा, चार जिंदा कारतूस और एक सफेद कार बरामद की है। दोनों के विरुद्ध पहले भी कई विभागीय भर्तियों में धांधली व नकल कराने के मामले दर्ज हैं, जिससे उनकी लंबे समय से चल रही अपराधी गतिविधियों की पुष्टि होती है।
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जांच में सामने आया है कि ये दोनों आरोपी काफी समय से विभिन्न सरकारी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को पास कराने का ‘ठेका’ लेते रहे हैं। वे संबंधित विभागों के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों से सांठगांठ कर गोपनीय सूचनाएँ प्राप्त करते और मोटी रकम के बदले अभ्यर्थियों को फंसाते थे। रिंकू और कपिल की गतिविधियों में परीक्षा में सॉल्वर को बैठाना, दौड़ और मेडिकल टेस्ट में पास कराने के लिए जुगाड़ लगाना और अभ्यर्थियों से 50 हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक वसूलना शामिल था। यह गैंग पिछले कई महीनों से विभिन्न जिलों में विभागीय भर्तियों को निशाना बना रहा था।
शनिवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि गैंग प्रादेशिक सेना की भर्ती में धांधली करने के इरादे से मेरठ पहुंचा है। सूचना के आधार पर जागृति विहार क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई। इसी दौरान एक संदिग्ध सफेद कार को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन कार में बैठे आरोपी मौके से भागने लगे। पुलिस टीम ने पीछा करते हुए उन्हें घेरकर गिरफ्तार कर लिया। तलाशी में अवैध हथियार की बरामदगी ने यह साफ कर दिया कि आरोपी भर्ती प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अपराध को अंजाम देने के लिए तैयार होकर आए थे।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि यह गैंग कई जिलों में सक्रिय रहा है और सरकारी भर्तियों में नकल, सेंधमारी और फर्जीवाड़े के जरिए मोटी कमाई कर रहा था। पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ पहले से दर्ज कई मामलों का भी जिक्र है। फिलहाल दोनों से कड़ी पूछताछ की जा रही है और पुलिस उनके अन्य साथियों की तलाश में जुट गई है। संबंधित विभागों के कर्मचारियों की भूमिका भी गंभीरता से जांच के दायरे में है ताकि पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जा सके।
पूछताछ में आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि वे किसी भी भर्ती प्रक्रिया से करीब एक महीने पहले ही सिस्टम में सेंध लगाने की तैयारी शुरू कर देते थे। वे विभागीय कर्मचारियों को बड़े मुनाफे का प्रलोभन देकर उन्हें अपने पक्ष में कर लेते, जिसके बाद अभ्यर्थियों को फंसाकर उनसे भारी रकम वसूली जाती थी। इस खुलासे के बाद मेरठ पुलिस पूरे प्रदेश में फैले इस सॉल्वर नेटवर्क की जड़ें तलाशने में लग गई है, ताकि ऐसी संगठित और पेशेवर धांधली को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।







