
सेवा, सादगी और मानवता के प्रतीक श्रवण कुमार माथुर का 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके अवसान से समाज ने एक प्रेरणास्रोत कर्मयोगी और निस्वार्थ समाजसेवी को खो दिया।
जोधपुर। जब देश 31 दिसंबर 2025 की रात बीते वर्ष को विदा कर नववर्ष 2026 के स्वागत की तैयारियों में मग्न था, उसी समय सेवा, सादगी और मानवता की अनुपम मिसाल श्रवण कुमार माथुर का निधन हो गया। उनके असामयिक अवसान से न केवल उनके परिवार पर, बल्कि पूरे समाज पर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा। वे 74 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। अपने पीछे वे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। श्रवण कुमार माथुर एक अत्यंत मिलनसार, संवेदनशील और सेवाभावी व्यक्तित्व थे।
अपने सेवाकाल में उन्होंने जहाँ-जहाँ कार्य किया, वहाँ टीम भावना, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपनी पहचान बनाई। वे केवल समाजसेवी ही नहीं थे, बल्कि एक ऐसे प्रेरणास्रोत थे, जिन्होंने अपने आचरण और विचारों से लोगों को निरंतर उत्कृष्टता की ओर प्रेरित किया। उनका निधन समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। वे सत्य और अहिंसा के प्रबल प्रहरी, निर्भीक विचारक और संपूर्ण मानवता के संरक्षक थे। जाति, धर्म, ऊँच-नीच और भेदभाव से ऊपर उठकर उन्होंने समाज को नैतिक मूल्यों की उच्चतम दिशा प्रदान की। अपने विवेक, नैतिक बल और मानवीय संवेदनाओं से उन्होंने इंसान और इंसानियत को सँवारा।
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इंसानियत को समर्पित इस महान विभूति की क्षतिपूर्ति संभव नहीं है। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो संसार से विदा होते समय अपने पीछे स्मृतियों और मूल्यों की अमिट विरासत छोड़ जाते हैं। उनका संपूर्ण जीवन जनसरोकारों और लोककल्याण को समर्पित रहा। श्रवण कुमार माथुर एक सच्चे कर्मयोगी, दूरदर्शी, परोपकारी और उच्च विचारों के धनी थे। उनकी विनम्रता, सूझ-बूझ, करुणा और मार्गदर्शन सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। कार्य के प्रति उनकी निष्ठा, दृढ़ संकल्प, समाज के प्रति समर्पण और प्रगतिशील विचारों के प्रति निस्वार्थ प्रतिबद्धता को हमेशा सुनहरे अक्षरों में याद किया जाएगा।
उनकी अनुपस्थिति से उत्पन्न रिक्तता का घाव शायद कभी पूरी तरह न भर सके। उनका मुस्कराता हुआ चेहरा, दूरदर्शी सोच, अथक प्रयास और निस्वार्थ दृष्टिकोण मानव समाज को सदैव प्रेरित करते रहेंगे। मानवीय मूल्यों से अनुप्राणित यह समाज उनके योगदान के लिए सदा कृतज्ञ रहेगा। सेवाभावी श्रवण कुमार माथुर उन विरले व्यक्तित्वों में से थे, जिनके जीवन का हर क्षण सेवा, करुणा और मानवता को समर्पित रहा। वे अक्सर कहा करते थे— “मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं।” उनका जीवन इस सत्य का जीवंत उदाहरण था। संक्षेप में, वे कर्मयोगी, क्रांति के पुरोधा, शांति के दूत, पथप्रदर्शक और संरक्षक थे।
वे एक ज्योतिपुंज के रूप में सदैव हमारे मार्ग को आलोकित करते रहेंगे। उनकी विद्वता, विराट व्यक्तित्व, मृदु स्वभाव और प्राणी मात्र के प्रति असीम स्नेह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। अपने बहुआयामी व्यक्तित्व से उन्होंने पारिवारिक, सामाजिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों में जो अमिट छाप छोड़ी है, उसका कोई सानी नहीं। उनका जीवन दर्शन आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा। उनके निधन पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, संस्थाओं और समाज के सभी वर्गों ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
😔श्रद्धांजलि संदेश :
😔देवभूमि समाचार, सेवा, सादगी और मानवता के प्रतीक स्वर्गीय श्रवण कुमार माथुर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करता है। उनका जीवन समाजसेवा, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत उदाहरण रहा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिजनों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति दें।








