
यह कविता मानवता, साहस और एकता के मूल्यों को उजागर करती है। कवि कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कराते हुए आगे बढ़ने, एक-दूसरे का हौसला बनने और सत्य व मानवता के दीप को निरंतर जलाए रखने का संदेश देता है।
- मानवता का उजास
- साहस और मुस्कान
- एकता का कारवां
- सत्य से टकराने का साहस
भुवन बिष्ट
रानीखेत (उत्तराखण्ड)
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हम तो सदा ही मानवता के दीप जलाते हैं,
उदास चेहरों पर सदा मुस्कराहट लाते हैं।
हार मानकर बैठते जो कठिन राहों को देख,
हौसला बढ़ाकर उनको भी चलना सिखाते हैं।
कर देते पग डगमग कभी उलझनें देखकर,
मन में साहस लेकर हम फिर भी मुस्कराते हैं।
मिल जाए साथ सभी का, बन जाएगा कारवाँ,
मिलकर आओ अब एकता की माला बनाते हैं।
लक्ष्य को पाने में सदा आती हैं कठिनाइयाँ,
साहस से जो डटे रहते, सदा मंज़िल वही पाते हैं।
राह रोकने को आती दीवारें सदा बड़ी-बड़ी,
सच्चाई पाने को अब हम दीवारों से टकराते हैं।
फैलाएँ आओ मानवता को मिलकर चारों ओर,
दुनिया को अपनी एकता, आओ हम दिखाते हैं।







