अपने सपनों को साकार कीजिए

सुनील कुमार माथुर
सपनें देखना अच्छी बात हैं और जीवन मे आगें बढने के लिए सपनें देखना भी आवश्यक है और उन सपनों को साकार करना और भी अच्छी बात हैं । जब हम सपनें देखतें है और उन सपनों का किसी के सामने जिक्र करतें है तो लोग हमारा मजाक उडाते है और हमें बेवकूफ और पागल तक समझते हैं और दूसरों के सामने हमें लज्जित करने से भी नहीं चूकते है लेकिन जब हमारे सपने साकार होते हैं तो जो लोग हमें पहले मूर्ख , पागल व बेवकूफ समझते थे उन्हे सबसे पहले गहरा सदमा लगता है ।
सपने देखना आसान हैं लेकिन उन्हे साकार करना उतना ही मुश्किल होता हैं लेकिन जब कोई उन्हें पूरा करने की ठान लेता हैं तो फिर सपनें साकार होने में देर नहीं लगती हैं और रास्ता स्वतः ही आसान होता चला जाता हैं । अगर आपका भी कोई सपना हो तो उसे साकार करने में लग जायें , आपकों सफलता अवश्य ही मिलेगी ।
लेखक का यह अनुभव रहा हैं कि जिसने जो चाहा वह करने की अगर ठान ली हैं तो फिर कोई भी ताकत ऐसी नहीं है जो आपके सपनों को साकार करने में बाधा बनकर खडी हो जायें । मेहनतकश लोग चटानो में भी आसान राह बना लेते हैं तो फिर सपनें क्या चीज है । आपकी कार्य के प्रति निष्ठा ईमानदारी ही आपकी सफलता की सबसे बडी कुंजी है । बस आप तो अपने मिशन मे लगें रहिए ।
आज हर कार्य ऑनलाइन हो रहा है । यहां तक की साहित्य लेखन भी ऑनलाइन हो गया हैं । आयें दिन ऑनलाइन चित्रकला कार्यशाला , कवि सम्मेलन , वार्ता , लेखन कार्यशाला , साक्षात्कार और न जाने कौन – कौन सी कार्यशाला एवं प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं । बस आप जुड जायें । आपकों सफलता अवश्य ही मिलेगी और सफलता आपके कदम चूमेगी ।
हमारा समाज दोगला हैं । वह हमारी हर कार्यशैली पर हंसते हैं । मजाक उडाते है और उनसे हमारी सफलता देखी नहीं जाती हैं । लेकिन वक्त का तकाजा है कि आप इधर कुंआ उधर खाई है फिर भी चिंता न करे और दृढ इच्छा शक्ति व दृढ संकल्प शक्ति के साथ आगें बढें । आपकों आगें बढाने वालें स्वतः ही आपके सामने आकर खडे हो जायेंगे और आपका मार्ग आसान कर देंगे । आप तो कदम से कदम मिलाते हुए आगें बढें ।
जब समाज में ऐसे भी लोग हैं जो कुछ भी नहीं करते हैं फिर भी समाचार पत्रों में झूठी वाह – वाही लूट रहे हैं तो फिर हम तो मेहनतकश लोग हैं । हमारा डंका अपने आप बोलने लगेगा चूंकि हमारा काम जो बोलता है । अतः दोगले लोगों से दूर रहें और आप अपने सपनों को साकार कीजिए । समय तो पंख लगाकर उडता है । अतः समय की कीमत को समझें और आगें बढें और अपने सपनों को सच और साकार कीजिए ।
लेखक परिचय
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Name »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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Shuchita Mathur
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