
डॉ आरुषि माथुर ने महिलाओं की शक्ति, आत्मविश्वास और बहुआयामी प्रतिभा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाएं अनेक जिम्मेदारियों को निभाते हुए सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। उन्होंने महिलाओं से अपने अंदर की शक्ति पहचानकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।
- महिलाओं को अपनी शक्ति पहचाननी होगी: डॉ आरुषि माथुर
- आत्मविश्वास और संघर्ष से महिलाएं हासिल कर रहीं सफलता
- महिला सशक्तिकरण पर डॉ आरुषि माथुर के विचार
- हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं देश की महिलाएं
सुनील कुमार माथुर
जोधपुर | महिलाओं को ईश्वर ने ऐसा हुनर दिया है कि वह एक साथ अनेक जिम्मेदारियों को संभालते हुए सफलता का परचम लहरा रही हैं। यह उद्गार डॉ आरुषि माथुर ने एक सामान्य भेंट में साहित्यकार सुनील कुमार माथुर के समक्ष प्रस्तुत किए। डॉ आरुषि ने बताया कि मेरा काम ही मेरी पूजा है और मेरा कार्यस्थल ही मेरा मंदिर है। उन्होंने कहा कि महिला के रूप में जन्म लेना अपने आप में सौभाग्य की बात है।
महिलाएं तो जन्म से ही शक्ति का रूप होती हैं, परन्तु आज के समय में भी कई महिलाएं अपने आप को कमजोर समझती हैं, जिसके लिए महिला सशक्तिकरण की बात करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में महिलाएं हर क्षेत्र में कार्य कर रही हैं और अपनी प्रतिभा का डंका देश-विदेशों में भी बजा रही हैं। इससे अधिक और गर्व की क्या बात हो सकती है। हमारे देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी एक महिला हैं, जो देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हैं।
वहीं दूसरी ओर शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र होगा जहाँ महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर न चल रही हों। वे कहती हैं कि महिलाओं को अपने अंदर की शक्ति को महसूस करना होगा। खुद को कमजोर न मानकर अपने अंदर आत्मविश्वास जगाना होगा। महिलाएं दुनिया बदलने की ताकत रखती हैं। अतः वे खुद को नजरअंदाज न करें। उन्हें निडर होकर सपने देखने चाहिए और फिर उस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
डॉ आरुषि का कहना है कि महिलाओं को खुद पर भरोसा रखना चाहिए। जब तक देश की हर महिला आत्मनिर्भर नहीं होगी, तब तक देश तरक्की के रास्ते पर वैसा नहीं चल पाएगा जैसा हम और आप सोचते हैं। यह भी सच है कि अपने हिस्से की कामयाबी पाने के लिए संघर्ष अधिक करना पड़ता है, लेकिन उन्हें संघर्ष से हारना नहीं है। चूंकि हुनर किसी वक्त और जगह का मोहताज नहीं होता है। अनुभवी और प्रतिभाशाली लोग अपनी प्रतिभा के बलबूते किसी भी सरहद को पार कर जाते हैं।
सुनील कुमार माथुर
33, वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी
खेमे का कुआँ, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान








बिल्कुल सही कहा! कामयाबी के लिए संघर्ष तो करना ही पड़ता है, लेकिन हार न मानने का जज्बा ही एक महिला को असली पहचान दिलाता है। सशक्त महिलाएं ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण करती हैं।
धन्यवाद
Nice article
धन्यवाद