
बचपन में अधिक चीनी का सेवन बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा रहा है। शोध बताते हैं कि शुरुआती तीन वर्षों में कम चीनी देने से भविष्य में हृदय रोगों का जोखिम काफी घट सकता है।
- बच्चों की थाली से कम करें चीनी, दिल की बीमारियों से मिलेगी सुरक्षा
- तीन साल तक चीनी से दूरी, भविष्य में हार्ट डिजीज का खतरा कम
- मीठा बना रहा बच्चों को बीमार, सेहतमंद विकल्प अपनाने की जरूरत
- शुगर कंट्रोल से बच्चों को मिलेगा हेल्दी और एक्टिव जीवन
आज के बदलते खानपान ने बच्चों की सेहत को गंभीर खतरे में डाल दिया है। चॉकलेट, बिस्किट, केक, पैक्ड जूस और प्रोसेस्ड फूड में मौजूद अधिक शुगर बच्चों को धीरे-धीरे कई गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रही है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो बीमारियां पहले उम्र बढ़ने के बाद होती थीं, वे अब कम उम्र में ही बच्चों को अपनी चपेट में ले रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के दैनिक आहार में जरूरत से ज्यादा चीनी और नमक मोटापा, डायबिटीज, दांतों की सड़न, कमजोर इम्यून सिस्टम और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याओं को जन्म देता है। इसके अलावा, बच्चों में हाइपरएक्टिविटी और बार-बार बीमार पड़ने की शिकायत भी अधिक शुगर सेवन से जुड़ी हुई है।
शोध बताते हैं कि जीवन के शुरुआती 1,000 दिन, यानी जन्म से लेकर लगभग तीन साल तक का समय, बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद निर्णायक होता है। इस अवधि में अगर बच्चों को चीनी का कम सेवन कराया जाए, तो बड़े होने पर कार्डियोवैस्कुलर यानी दिल और धमनियों से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
यूके बायोबैंक के 63,433 बच्चों के डेटा पर आधारित एक अध्ययन में सामने आया कि जिन बच्चों को जन्म के पहले दो वर्षों तक कम चीनी दी गई, उनमें दिल की बीमारियों का जोखिम 20 प्रतिशत तक कम पाया गया। यही नहीं, ऐसे बच्चों में हार्ट फेलियर का खतरा 26 प्रतिशत, हार्ट अटैक 25 प्रतिशत, एट्रियल फिब्रिलेशन 24 प्रतिशत और स्ट्रोक का जोखिम 31 प्रतिशत तक कम देखा गया।
हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अधिकतर बच्चों को यह पता ही नहीं चलता कि वे दिनभर में कितनी चीनी ले रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार बच्चों को प्रतिदिन 25 ग्राम से अधिक चीनी नहीं लेनी चाहिए, लेकिन भारत में यह मात्रा अक्सर इससे कहीं ज्यादा होती है। इसका असर न केवल बच्चों के वजन और दांतों पर पड़ता है, बल्कि भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों की नींव भी यहीं से पड़ जाती है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि बच्चों के आहार में ताजे फल, घर का बना खाना और प्राकृतिक मिठास को प्राथमिकता दी जाए। समय रहते चीनी की मात्रा पर नियंत्रण बच्चों को एक स्वस्थ, सक्रिय और रोगमुक्त भविष्य देने में मदद कर सकता है।








