
यह आलेख लेखन को अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताते हुए बच्चों के नैतिक, चारित्रिक और बौद्धिक विकास में उसकी भूमिका को रेखांकित करता है। साथ ही अणुव्रत लेखक मंच के माध्यम से रचनात्मकता, संवाद और नैतिक मूल्यों को समाज तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल देता है।
- बच्चों के सर्वांगीण विकास में लेखन की भूमिका
- रचनात्मकता, आत्मविश्वास और संचार कौशल का आधार
- अणुव्रत लेखक मंच और नैतिक लेखन की पहल
- साहित्यिक मंचों से संस्कारित समाज की ओर
सुनील कुमार माथुर
लेखन अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है, इसलिए स्कूली शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में नैतिक, चारित्रिक, मानवीय उत्थान, आध्यात्मिक तथा सामाजिक व्यवहार शुद्धि के क्षेत्र में कार्य करने के लिए लेखन, भाषण व कविता प्रतियोगिताओं का भी सप्ताह में एक दिन आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों में छिपी प्रतिभा को समय रहते निखारा जा सके। इसी के साथ-साथ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और संचार कौशल बढ़ता है। वहीं विद्यार्थी विविध विषयों पर अपने विचार जन-जन तक पहुँचा सकते हैं और बच्चों में विचारों का आदान-प्रदान होता है। इतना ही नहीं, इससे विद्यार्थियों में छिपी रचनात्मकता की अभिव्यक्ति होती है।
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इसके साथ-साथ बच्चों में अनुशासन भी बढ़ता है। बस प्रतिभा को निखारने के लिए एक मंच होना चाहिए, जहाँ सभी को निष्पक्षता के साथ अपने विचार व्यक्त करने का अवसर मिल सके। अणुव्रत लेखक मंच एक ऐसा मंच है, जिसकी सदस्यता (जुड़ाव) निःशुल्क है और यह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रहा है, जिसका उद्देश्य नैतिक मूल्यों, मानवीय मूल्यों एवं चारित्रिक विकास के लेखन को प्रोत्साहित करना है। अणुव्रत लेखक मंच एक ऐसा मंच है, जो साहित्यकारों के मध्य सतत चिंतन-मनन एवं विचारों का आदान-प्रदान करने की भावभूमि उपलब्ध कराकर संस्कारी, सकारात्मक, स्वस्थ और नैतिक लेखन से जुड़े लेखकों की शक्ति को संगठित रूप से लेखकीय आभा के साथ समाज को एक नई दिशा देने का कार्य करता है।
अणुव्रत लेखक मंच समय-समय पर अणुव्रत लेखक सम्मेलन का भी आयोजन करता है, जिसका उद्देश्य विचारों का आदान-प्रदान करना व समसामयिक विषयों पर चर्चा करना है। हाल ही में 5 से 7 अक्टूबर 2025 को प्रेक्षा विश्व भारती, कोबा, अहमदाबाद (गुजरात) में तीन दिवसीय अणुव्रत लेखक सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें साहित्यकारों ने अपनी सहभागिता निभाई और विचारों के आदान-प्रदान के साथ-साथ जैन संतों के विचार सुनने को मिले, जिससे एक नई दशा व दिशा मिली।
प्रति वर्ष उत्कृष्ट नैतिक और आदर्श लेखन के लिए चयनित लेखक को अणुव्रत लेखक पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। अतः हर गाँव व शहर में साहित्यिक मंच की स्थापना होनी चाहिए, जहाँ माह में एक बार साहित्यिक संगोष्ठी अवश्य हो, ताकि विचारों का आदान-प्रदान हो सके और इससे संचार कौशल व आत्मविश्वास बढ़ सके। वैसे भी मोबाइल की इस दुनिया ने आपसी संवाद को लगभग समाप्त-सा कर दिया है, जिसकी हमें पुनः स्थापना करनी होगी।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य, अणुव्रत लेखक मंच
39/4, पीडब्ल्यूडी कॉलोनी, जोधपुर, राजस्थान





