
यह कविता लाला लाजपत राय के जीवन, विचार और राष्ट्र के प्रति उनके अद्वितीय योगदान को श्रद्धापूर्वक प्रस्तुत करती है। शिक्षा, लेखन, आंदोलन, संस्थान निर्माण और पूर्ण स्वतंत्रता के संघर्ष में उनकी भूमिका को ओजस्वी काव्यात्मक शैली में रेखांकित किया गया है। रचना राष्ट्रभक्ति और प्रेरणा का सशक्त स्वर है।
- पंजाब केसरी की अमर गाथा
- लाला लाजपत राय: शिक्षा, संघर्ष और स्वतंत्रता
- शेर-ए-पंजाब का राष्ट्र समर्पण
- लाल-बाल-पाल की क्रांतिकारी विरासत
गणपत लाल उदय
अजमेर, राजस्थान
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ऐसे नेताओं में एक थे वह लाला लाजपत राय,
स्कूली शिक्षण पश्चात किए जो कानूनी पढ़ाई।
धर्म-पत्नी जिनकी राधा देवी, भाई धनपत राय,
सम्पूर्ण स्वतंत्रता के खातिर लड़ते रहे लड़ाई।।
कलम जिनकी ऐसी भयंकर आग जो उगलती,
ये वाणी जिनकी ऐसी क्रांति उत्पन्न कर देती।
दोनों ही मुख्य रूप से ये विशेषताएँ थीं उनकी,
तेजस्विता की किरणें शीश पर उनके ये चमकती।।
बचपन से ही था जिनका ऐसा एक यह सपना,
बाहर की ताक़तों से मुक्त हो ये भारत अपना।
मुंशी राधाकृष्ण पिता थे व गुलाबी देवी माता,
भगत, आज़ाद, राजगुरु आदर्श मानते अपना।।
पंजाब नेशनल बैंक का आपने स्थापना किया,
यह लक्ष्मी बीमा कम्पनी भी आप ही चलाए।
ढेर स्कूल खोले उन्होंने एवं बनवाए अस्पताल,
धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाने का अभियान चलाए।।
कई किताबें लिखीं आपने, कई किए आंदोलन,
आज लाल-बाल-पाल से भी जानता जन-जन।
पंजाब केसरी भी कहलाए, आप शेर-ए-पंजाब,
कई संगठनों के रहे संस्थापक, जीते आप मन।।







