
फतेहपुर से अगवा किशोरी के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और फिर बिहार ले जाकर उसका जबरन धर्मांतरण कर मस्जिद में निकाह कराया गया। पुलिस ने आरोपी के पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश जारी है।
- अपहरण के बाद जयपुर में दुष्कर्म, फिर बिहार में धर्मांतरण
- धर्मांतरण में सहयोग के आरोप में आरोपी का पिता गिरफ्तार
- मस्जिद में निकाह का मामला, मुख्य आरोपी फरार
- किशोरी की बरामदगी के बाद खुला अंतरराज्यीय अपराध का नेटवर्क
फतेहपुर | उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से सामने आए एक गंभीर और संवेदनशील मामले ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खखरेरू थाना क्षेत्र से अगवा की गई एक किशोरी के साथ दुष्कर्म किए जाने और बाद में उसका जबरन धर्मांतरण कर मस्जिद में निकाह कराए जाने का मामला उजागर हुआ है।
पीड़िता 30 दिसंबर को अपने गांव से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने बिहार निवासी मोहम्मद समीर के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि आरोपी गांव में रहकर रजाई-गद्दे की भराई का काम करता था और इसी दौरान उसने किशोरी को आर्थिक संपन्नता और बेहतर जीवन का झांसा देकर अपने साथ ले गया।
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पुलिस के अनुसार आरोपी पहले किशोरी को राजस्थान के जयपुर ले गया, जहां एक परिचित के घर पर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद वह किशोरी को बिहार के मधेपुरा जिले स्थित अपने पैतृक गांव ले गया। वहां आरोपी के पिता मोहम्मद सगीर की मदद से एक मस्जिद में किशोरी का जबरन धर्मांतरण कराया गया और उसी स्थान पर निकाह संपन्न कराया गया।
पीड़िता के बयान में यह भी सामने आया है कि बिहार में भी उसके साथ दुष्कर्म किया गया। परिस्थितियां बिगड़ने के बाद आरोपी उसे लेकर वापस लौट रहा था, तभी 11 जनवरी को पुलिस ने किशोरी को बरामद कर लिया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने धर्मांतरण में सहयोग करने के आरोप में आरोपी के पिता मोहम्मद सगीर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
विवेचक प्रशांत मिश्रा ने बताया कि मुख्य आरोपी मोहम्मद समीर की तलाश की जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अंतरराज्यीय अपराध, दुष्कर्म और अवैध धर्मांतरण से जुड़ा हुआ है, जिसमें सभी कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना महिला सुरक्षा, कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और संगठित अपराधों पर निगरानी की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है।








