
Rahul Gandhi की नाराजगी के बाद Indian National Congress की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक देर रात तक चली। Mallikarjun Kharge के आवास पर हुई इस बैठक में उम्मीदवारों के चयन पर गहन चर्चा की गई। बैठक में यह फैसला लिया गया कि किसी भी मौजूदा सांसद को केरल विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया जाएगा।
- राहुल गांधी की सख्ती, देर रात तक चली कांग्रेस की अहम बैठक
- केरल चुनाव से पहले कांग्रेस में मंथन, टिकट पर बड़ा फैसला
- आधी रात की मीटिंग में उम्मीदवारों पर हुई गहन समीक्षा
- सांसदों को चुनाव लड़ने से रोका, कांग्रेस में नई रणनीति
नई दिल्ली। केरल विधानसभा चुनाव को लेकर Indian National Congress ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए राजधानी दिल्ली में देर रात तक मंथन किया। यह अहम बैठक Mallikarjun Kharge के आवास 10 राजाजी मार्ग पर आयोजित की गई, जिसमें वरिष्ठ नेताओं ने उम्मीदवारों के चयन पर विस्तार से चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, यह बैठक रात करीब 10:30 बजे शुरू हुई और तड़के 2:30 बजे तक चली। इस मैराथन मीटिंग के पीछे मुख्य वजह Rahul Gandhi की उम्मीदवारों की सूची को लेकर असंतुष्टि बताई जा रही है।
उन्होंने टिकट बंटवारे में अधिक व्यवस्थित और डेटा-आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया, जिसमें जातीय समीकरण, जीत की संभावना और उम्मीदवारों के पिछले प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाए। बैठक में एक बड़ा फैसला लेते हुए यह तय किया गया कि किसी भी मौजूदा सांसद को केरल विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा। इस निर्णय के पीछे पार्टी का तर्क है कि सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने से लोकसभा सीटों पर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है और मुख्यमंत्री पद को लेकर भ्रम भी पैदा हो सकता है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उम्मीदवारों की सूची में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के प्रभाव की चर्चा भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में उम्मीदवार उनके करीबी माने जा रहे हैं, जबकि अन्य वरिष्ठ नेताओं के गुटों को भी सीमित प्रतिनिधित्व मिला है। हालांकि, अंतिम चयन में सर्वे रिपोर्ट, स्थानीय फीडबैक और जिला इकाइयों की राय को अहम आधार बनाया गया। कांग्रेस इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
पार्टी ने ईसाई, नायर और एझावा समुदाय को बड़ी संख्या में टिकट दिए हैं, जबकि मुस्लिम और ब्राह्मण समुदाय को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। साथ ही, युवाओं को मौका देने के लिए उम्मीदवारों की उम्र सीमा को भी ध्यान में रखा गया है। हालांकि, टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर असंतोष भी उभरकर सामने आया है। महिला प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए गए हैं, क्योंकि घोषित उम्मीदवारों में महिलाओं की संख्या बेहद कम है।
इस मुद्दे को लेकर पार्टी के कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी भी जाहिर की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की लंबी और गहन बैठकों से यह साफ संकेत मिलता है कि कांग्रेस केरल चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। अब देखना होगा कि यह रणनीति चुनावी मैदान में पार्टी को कितना फायदा पहुंचाती है।







