
बिजनौर जिले में कांवड़ यात्रा के दौरान तेंदुए (गुलदार) के हमलों से श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई है। नहटौर और चांदपुर क्षेत्र में बाल कांवड़िये सहित कई शिवभक्त घायल हो चुके हैं, जबकि एक गुलदार को नांगल सोती क्षेत्र में पिंजरे में कैद किया गया है। प्रशासन और वन विभाग ने गश्त बढ़ाकर संवेदनशील मार्गों पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है।
- बिजनौर में शिवभक्तों पर तेंदुए के हमले से दहशत
- नहटौर-चांदपुर कांवड़ रूट पर बढ़ा वन्यजीव खतरा
- बाल कांवड़िये समेत कई श्रद्धालु घायल
- वन विभाग ने लगाया पिंजरा, गश्त बढ़ाई गई
बिजनौर। बिजनौर जिले में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान तेंदुए (गुलदार) के हमलों ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो दिनों में नहटौर और चांदपुर क्षेत्र में कांवड़ियों पर हमले की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि प्रशासन और वन विभाग ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभालते हुए निगरानी और गश्त तेज कर दी है। नहटौर क्षेत्र में शुक्रवार सुबह अमरोहा जिले के दढियाल खादर निवासी आठ वर्षीय बाल कांवड़िये अनिकेत पर अचानक गुलदार ने झपट्टा मार दिया।
वह हरिद्वार से कांवड़ लेकर अपने जत्थे के साथ लौट रहा था। गांव सीकरी बुजुर्ग के पास बाग से निकले तेंदुए ने हमला किया, लेकिन साथी कांवड़ियों के शोर मचाने पर वह जंगल की ओर भाग गया। घायल बालक को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया। इससे पहले अलीगढ़ जिले के नंगलिया बीजना निवासी 32 वर्षीय कांवड़िये सोनू पर भी कथित रूप से गुलदार ने हमला कर घायल कर दिया था। घटना रात के समय हुई, जब अंधेरा अधिक था और हमलावर जंगली जानवर को स्पष्ट रूप से देखा नहीं जा सका। दोनों घटनाओं के बाद कांवड़ मार्ग पर भय का माहौल बन गया है।
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एक गुलदार पिंजरे में कैद
नांगल सोती तहसील के रायपुर खास नहर पटरी क्षेत्र में वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में एक गुलदार कैद किया गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उसे राजगढ़ रेंज ले जाया गया। संयोग से जिस नहर पटरी पर गुलदार पकड़ा गया, उसके समानांतर दूसरी पटरी पर कांवड़ यात्रा चल रही थी।
अंधेरा बना बड़ी समस्या
नहटौर कोतवाली रोड और आसपास का क्षेत्र इन दिनों कांवड़ियों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है। मार्ग पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से तड़के और देर रात गुजरने वाले श्रद्धालुओं को घने अंधेरे में सफर करना पड़ता है। गांव सीकरी बुजुर्ग के पास खेतों और बागों से सटा सुनसान इलाका वन्यजीवों की गतिविधियों के लिए अनुकूल माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चेतावनी बोर्ड तो लगाए गए हैं, लेकिन प्रकाश व्यवस्था के अभाव में वे प्रभावी साबित नहीं हो रहे। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि कांवड़ यात्रा के दौरान संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, नियमित गश्त और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन की तैयारी
शनिवार को कांवड़ यात्रा के अंतिम दिन को देखते हुए पुलिस और वन विभाग ने संयुक्त गश्त बढ़ा दी है। संवेदनशील मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है तथा पिंजरे लगाकर गुलदार को पकड़ने का प्रयास जारी है। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें अलर्ट मोड पर हैं।








