
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द के बयानों के बाद भाजपा को लेकर जनता के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। एक पूर्व भाजपा समर्थक सत्ता के अहंकार, अत्याचार और मूल मुद्दों से भटकाव का आरोप लगाता है। वीडियो में डबल इंजन सरकार पर सवाल उठाते हुए लोकतांत्रिक विमर्श को सामने रखा गया है।
- अंध-समर्थक से असंतुष्ट तक: भाजपा पर उठते कड़े सवाल
- डबल इंजन या लड़खड़ाती व्यवस्था? जनता पूछ रही है
- सत्ता, अहंकार और सवाल: बदलती जनभावना की कहानी
- मंदिर, संत और सत्ता: आखिर देश किस ओर जा रहा है?
राज शेखर भट्ट
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द के हालिया बयानों के बाद भारतीय राजनीति में एक नई गर्माहट देखने को मिल रही है। आम जनता के बीच भाजपा को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। कुछ विरोधी प्रधानमंत्री के पक्ष में हैं तो कुछ विपक्ष में, लेकिन सच्चाई देश के गले में फांस बनकर लटकी हुयी है। इस यूट्यूब शॉर्ट में एक ऐसे व्यक्ति की राय सामने आती है, जो कभी भाजपा का अंध-समर्थक और वोटर था, लेकिन अब पार्टी से पूरी तरह दूरी बना चुका है।
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उसका आरोप है कि सत्ता में आने के बाद भाजपा के नेताओं में अहंकार आ गया है और सरकार अत्याचार की मिसालें कायम कर रही है। जब सरकार ऐसी है तो मुखिया कैसा होगा, यह बहुत ही चिंतन करने वाली बात है। क्या मंदिरों को तोड़ना और संतों का अपमान करना ही इनका लक्ष्य बनकर रह गया है।
वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “डबल इंजन सरकार” पर भी सवाल उठाया गया है- क्या इंजन में कोई खराबी आ गई है या व्यवस्था ही लड़खड़ा रही है? यह वीडियो किसी पार्टी विशेष के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि जनता के सवालों और लोकतांत्रिक विमर्श को सामने रखने का प्रयास है।









2 thoughts on “क्या नरेन्द्र मोदी जी भी अहंकारी हैं…?”