
यह कविता मानवता, करुणा और सेवा के महत्व को दर्शाती है। इसमें बताया गया है कि सच्ची भक्ति मंदिरों में नहीं, बल्कि इंसान के भीतर दया और सहानुभूति में बसती है। दूसरों की मदद करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
- सच्ची भक्ति का मार्ग
- मानवता ही सबसे बड़ा धर्म
- दिल में बसता है भगवान
- करुणा की मौन पूजा
डॉ. प्रियंका सौरभ
भगवान के मंदिर में भी,
दीन देखकर भीड़ उमड़ती है,
करुणा की वो सच्ची पूजा,
दिलों में चुपचाप ही चढ़ती है।
तुम तो फिर भी आम इंसान हो,
क्यों इतना अभिमान लिए फिरते हो,
थोड़ा सा दिल को खोलो तो,
कितनों के भगवान बन सकते हो।
भूखे को रोटी, प्यासे को जल,
यही सबसे बड़ा दान होता है,
मूरत में नहीं, मन में बसता,
सच्चा ईश्वर वहीं महान होता है।
मंदिर-मस्जिद बाद में जाना,
पहले मानवता निभाना सीखो,
जिसके दिल में दया बसती है,
वही सच्चा भक्त है—यह समझो।
(डॉ. प्रियंका सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक हैं।)








