
उत्तराखंड की नदियों और गदेरों में खतरनाक जीवाणुओं की मौजूदगी सामने आने के बाद राज्य में पेयजल की जैविक जांच शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद जल संस्थान की 27 लैब को माइक्रोबायोलॉजी जांच के लिए तैयार किया जा रहा है। शासन ने इसके लिए 192 लाख रुपये का बजट जारी किया है।
- 27 लैब में शुरू होगी बैक्टीरिया और वायरस की जांच
- अब तक केवल फिजियो-केमिकल जांच तक सीमित थीं लैब
- माइक्रोबायोलॉजी मान्यता के लिए 1.92 करोड़ का बजट जारी
- दूषित पानी से होने वाली बीमारियों पर लगेगी रोक
देहरादून। उत्तराखंड की नदियों, गाड-गदेरों और पेयजल स्रोतों में खतरनाक बैक्टीरिया, वायरस, कवक और परजीवी पनपने की आशंका ने स्वास्थ्य विभाग और जल संस्थान की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद राज्य सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए प्रदेशभर में पानी की माइक्रोबायोलॉजी (जैविक) जांच शुरू करने का फैसला लिया है। प्रदेश में जल संस्थान की कुल 27 प्रयोगशालाएं संचालित हैं, जिनमें 13 जिलास्तरीय, 13 उपखंडीय और एक राज्यस्तरीय लैब शामिल है।
ये सभी लैब अभी तक केवल पानी की फिजियो-केमिकल जांच—जैसे पीएच, टीडीएस, क्लोराइड, फ्लोराइड, आयरन आदि—के लिए एनएबीएल से मान्यता प्राप्त हैं। हालांकि अब तक इन लैबों में पानी में मौजूद बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों की जांच की सुविधा नहीं थी। जल संस्थान ने सभी प्रयोगशालाओं को माइक्रोबायोलॉजी जांच के योग्य बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शासन की ओर से 192 लाख रुपये (1.92 करोड़) का बजट जारी किया गया है।
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इस राशि से प्रयोगशालाओं में बायोसेफ्टी कैबिनेट, इंक्यूबेटर, ऑटोक्लेव, मेंब्रेन फिल्ट्रेशन असेंबली, कॉलोनी काउंटर, सूक्ष्मदर्शी और इलेक्ट्रॉनिक तुला जैसे अत्याधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि माइक्रोबायोलॉजी जांच शुरू होने के बाद पानी में मौजूद ई-कोलाई, साल्मोनेला, वायरस और अन्य हानिकारक जीवाणुओं की समय रहते पहचान हो सकेगी। इससे डायरिया, पीलिया, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, सभी प्रयोगशालाओं को एनएबीएल से माइक्रोबायोलॉजी मान्यता दिलाने के बाद प्रदेशभर में नियमित रूप से पेयजल की जैविक गुणवत्ता की जांच की जाएगी। इससे भविष्य में दूषित पानी से होने वाली किसी भी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सकेगा और आम लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा।






