
UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान दो घंटे के संक्षिप्त दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। यह यात्रा भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और मध्य पूर्व की मौजूदा अस्थिरता पर विचार-विमर्श के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
- मध्य पूर्व संकट के बीच UAE राष्ट्रपति की त्वरित भारत यात्रा
- एयरपोर्ट पर गले मिले मोदी-MBZ, साझा की तस्वीरें
- रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने पर फोकस
- ईरान-यमन तनाव चर्चा का अहम एजेंडा
- UAE राष्ट्रपति बनने के बाद भारत की तीसरी यात्रा
नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार को मात्र दो घंटे के संक्षिप्त दौरे पर भारत पहुंचे। उनके आगमन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचकर आत्मीय स्वागत किया, जिससे भारत-UAE के बीच मजबूत दोस्ती और आपसी विश्वास की झलक देखने को मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर अल नाहयान के साथ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने “अपने भाई” UAE राष्ट्रपति का स्वागत किया और दोनों देशों के बीच होने वाली चर्चाओं को लेकर उत्सुक हैं।
UAE राष्ट्रपति बनने के बाद यह अल नाहयान की तीसरी आधिकारिक भारत यात्रा है, जबकि कुल मिलाकर वह पांचवीं बार भारत आए हैं। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब मध्य पूर्व गंभीर अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। ईरान में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, वहीं यमन को लेकर भी क्षेत्रीय शक्तियों के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और शेख मोहम्मद बिन जायद की बातचीत में ईरान-यमन संकट, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात प्रमुख एजेंडा होंगे।
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विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपने बयान में कहा कि इस यात्रा से भारत और UAE को रणनीतिक साझेदारी के नए आयाम स्थापित करने का अवसर मिलेगा। दोनों नेता न केवल द्विपक्षीय सहयोग, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा करेंगे, जिन पर दोनों देशों के दृष्टिकोण में व्यापक समानता है। हाल के वर्षों में भारत और UAE के रिश्ते ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में तेजी से मजबूत हुए हैं।
अल नाहयान की यह त्वरित लेकिन महत्वपूर्ण यात्रा इस बात का संकेत मानी जा रही है कि दोनों देश बदलते वैश्विक परिदृश्य में एक-दूसरे को विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार के रूप में देखते हैं। कुल मिलाकर, भले ही यह दौरा समय के लिहाज से छोटा रहा, लेकिन इसके राजनयिक और रणनीतिक मायने बड़े माने जा रहे हैं, जो आने वाले समय में भारत-UAE संबंधों को और गहराई देने का आधार बन सकते हैं।







