
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बड़े खुलासे सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइल ने वर्षों तक तेहरान के ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क और खुफिया निगरानी के जरिए डिजिटल जाल बुना और सटीक एयरस्ट्राइक को अंजाम दिया। इस घटनाक्रम के बाद मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है और वैश्विक ऊर्जा व एविएशन सेक्टर प्रभावित हुए हैं।
- तेहरान के कैमरों की हैकिंग से एयरस्ट्राइक तक की कहानी
- US-इज़राइल जॉइंट ऑपरेशन का पहला फेज़ कैसे चला
- खामेनेई के डेली रूटीन पर सालों की निगरानी
- मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव, वैश्विक तेल बाजार पर असर
नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। ब्रिटिश अखबार Financial Times और अमेरिकी मीडिया नेटवर्क CNN की रिपोर्टों में इस कथित ऑपरेशन के पीछे की हाई-टेक रणनीति का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली खुफिया एजेंसियों ने वर्षों तक तेहरान के ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क में सेंध लगाने के लिए निवेश किया। शहर की सड़कों पर लगे कैमरों को कथित रूप से हैक कर उनका लाइव फीड इज़राइल के सर्वरों तक पहुंचाया जा रहा था।
सबसे महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु पाश्चर स्ट्रीट के आसपास बताया गया, जहां सर्वोच्च नेता का आधिकारिक परिसर स्थित था। इससे सुरक्षा व्यवस्था, गाड़ियों की पार्किंग और दैनिक गतिविधियों के पैटर्न का विश्लेषण संभव हुआ। बताया गया कि अमेरिकी और इज़राइली अधिकारियों ने खामेनेई के रूटीन—उनकी बैठकों, आवाजाही और संभावित सुरक्षित ठिकानों—का बारीकी से अध्ययन किया। योजना के तहत शनिवार सुबह तेहरान के एक उच्च सुरक्षा परिसर को निशाना बनाया गया, जहां शीर्ष राजनीतिक और सैन्य अधिकारी मौजूद थे।
सूत्रों के मुताबिक, मूल रूप से यह हमला रात में होना था, लेकिन अंतिम समय में इसे दिन में अंजाम दिया गया। स्थानीय समयानुसार सुबह करीब छह बजे फाइटर जेट्स ने सटीक निर्देशित बम गिराए। इसे अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त ऑपरेशन का पहला चरण बताया गया। एक अनाम इज़राइली सैन्य अधिकारी ने Associated Press को बताया कि 60 सेकंड के भीतर तीन लक्ष्यों को साधा गया। इस हमले में कथित रूप से करीब 40 वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि कठिन बनी हुई है।
पहले भी हाई-टेक ऑपरेशन
सितंबर 2024 में इज़राइल की खुफिया एजेंसी Mossad पर आरोप लगा था कि उसने लेबनान और सीरिया में Hezbollah के लड़ाकों को विस्फोटक पेजर और वॉकी-टॉकी के जरिए निशाना बनाया। उस ऑपरेशन में कथित तौर पर शेल कंपनियों और भ्रामक विज्ञापनों का इस्तेमाल किया गया था।
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
इन हमलों के बाद मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान में अनेक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और जवाबी हमलों की घटनाएं भी सामने आईं। खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बिगड़ने से वैश्विक एविएशन प्रभावित हुआ है और Strait of Hormuz से होकर गुजरने वाले तेल व्यापार में बाधा आई है। यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग पांचवें हिस्से के तेल परिवहन के लिए अहम मार्ग है, जिससे ऊर्जा कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। मध्य-पूर्व में तेजी से बदलते हालात ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता में डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास तेज नहीं हुए तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।








