
आगरा। ऋषि ऋषि वैदिक साहित्य पुस्तकालय परिवार द्वारा हिंदी दिवस के पावन अवसर पर एक ऑनलाइन गोष्ठी व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया । इस अवसर पर देश भर के हिंदी सेवी जनों को हिंदी दीप व हिंदी ज्योति सम्मान प्रदान किये गये। राजभाषा हिंदी राष्ट्रभाषा कैसे बने ? इस विषय पर शिक्षाविदों ने विस्तारपूर्वक चर्चा की।
आज हिंदी पहले की अपेक्षा काफी समृद्ध व मजबूत भाषा बन चुकी है। इंटरनेट पर भी हिंदी अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। बृजलोक साहित्य, कला, संस्कृत अकादमी की सहयोगी संस्था – ऋषि वैदिक साहित्य पुस्तकालय वर्ष 2010-11 से लगातार हिंदी साहित्य की श्रीवृद्धि के लिए प्रयत्नशील है । पुस्तकालय परिवार को तमाम तरह का सहयोग डॉ. नरेश कुमार सिहाग एडवोकेट व मनभावन प्रिंटर्स का प्राप्त होता रहता है।
पुस्तकालय संचालक मुकेश कुमार ऋषि वर्मा के अनुसार, पुस्तकालय पूर्णत: निशुल्क संचालित हैं । कोई भी पुस्तक प्रेमी निशुल्क सत साहित्य प्राप्त कर सकता है । पुस्तकालय परिवार राष्ट्रीय स्तर पर सदस्यता अभियान भी चला रहा है । सदस्य बनने पर सदस्यता परिचय पत्र निर्गत किए जाते हैं एवं पुस्तकालय द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में सहभागिता दर्ज कराई जाती है और भी तमाम लाभ सदस्यों को प्राप्त होते हैं। कुल मिलाकर हिंदी दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम पूर्णतः सफल रहा ।
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– कार्यकारी अध्यक्ष







