
हरिद्वार में युगधारा फाउंडेशन के राष्ट्रीय साहित्यकार अधिवेशन में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. छगन लाल गर्ग की पुस्तक ‘छगन दोहावली विविधा’ का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर उन्हें साहित्य रत्नाकर सम्मान से सम्मानित किया गया।
- युगधारा फाउंडेशन के राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन
- देशभर से पहुंचे 100 से अधिक साहित्यकार
- उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति रहे मुख्य अतिथि
- साहित्य जगत में डॉ. गर्ग के योगदान की सराहना
हरिद्वार। पावन तीर्थ नगरी हरिद्वार में युगधारा फाउंडेशन, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के अष्टम वार्षिकोत्सव समारोह एवं राष्ट्रीय साहित्यकार अधिवेशन का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नकलंक धाम, भूपतवाला, भारतमातापुरम स्थित सभा कक्ष में संपन्न हुआ, जिसमें देशभर से आए साहित्यकारों और विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. छगन लाल गर्ग (निवासी—जीरावल, जिला सिरोही, राजस्थान) की 13वीं पुस्तक ‘छगन दोहावली विविधा’ का विधिवत लोकार्पण किया गया। समारोह के दौरान उनके उल्लेखनीय और दीर्घकालिक साहित्यिक योगदान को सम्मान देते हुए उन्हें ‘साहित्य रत्नाकर सम्मान’ से अलंकृत किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें प्रशस्ति पत्र के साथ ₹2500 की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
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कार्यक्रम में परम पूज्य बापू राजेंद्र दास बापू का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति डॉ. दिनेश चंद्र शास्त्री उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में पूर्व निदेशक भाषा संस्थान उत्तराखंड डॉ. सरिता मोहन, डॉ. श्रीनिवास शुक्ल, युगधारा फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती गीता अवस्थी, महासचिव सौम्या मिश्रा, आचार्य रामकृष्ण सहस्त्रबुद्धे तथा संयोजक डॉ. शिवमोहन सिंह सहित अनेक प्रख्यात साहित्यकार मंचासीन रहे।
समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 100 साहित्यकारों ने सहभागिता की। वक्ताओं ने डॉ. छगन लाल गर्ग की रचनाओं को साहित्य जगत के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उनकी कृतियां भारतीय साहित्य की समृद्ध परंपरा को सशक्त बनाती हैं। कार्यक्रम का वातावरण साहित्यिक संवाद, सृजनात्मक चिंतन और सांस्कृतिक गरिमा से ओतप्रोत रहा।





