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देहरादून के गोविंद नगर में जमा 1.30 लाख मिट्रिक टन कूड़े का पहाड़ कुंभ मेले से पहले हटाया जाएगा। नगर निगम ने 7.19 करोड़ की डीपीआर शासन को भेजी है, ताकि वर्षों से फैली दुर्गंध, गंदगी और पर्यावरणीय खतरे से लोगों को राहत मिल सके।
- गर्मियों में आग, बरसात में कूड़े का बहाव—स्थानीय लोग सालों से परेशान
- पहली डीपीआर 26 करोड़ की बनी थी, लागत अधिक होने पर रद्द
- लालपानी बीट का प्लांट निर्माणाधीन, काम की रफ्तार बेहद धीमी
- कुंभ मेला क्षेत्र में ऋषिकेश होने से बढ़ी तैयारी की संवेदनशीलता
देहरादून। शहर के बीचों-बीच स्थित गोविंद नगर में वर्षों से जमा हो रहा कूड़े का पहाड़ आखिरकार कुंभ मेले से पहले हटाने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है। नगर निगम देहरादून ने कूड़ा निस्तारण के लिए 7.19 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर शासन को भेज दी है। निगम का आकलन है कि इस स्थल पर करीब 1.30 लाख मिट्रिक टन कूड़ा जमा हो चुका है, जो स्थानीय निवासियों और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर समस्या बन चुका है। नगर पालिका से नगर निगम बनने के बावजूद शहर में अब तक अपना स्थायी कूड़ा निस्तारण केंद्र विकसित नहीं हो पाया।
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इसी कारण वर्षों से गोविंद नगर में लगातार कूड़ा डंप किया जाता रहा है, जिसके कारण यहाँ एक विशाल कूड़े का पहाड़ बन गया है। समय-समय पर निगम कुछ हिस्से से कूड़ा हटाता जरूर है, लेकिन नियमित डंपिंग के चलते स्थिति जस की तस बनी रहती है। गंगा से नजदीकी और घनी आबादी के बीच स्थित यह कूड़ा स्थल स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए लगातार खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोग लंबे समय से दुर्गंध, धुएँ और गंदगी की समस्या से जूझ रहे हैं। गर्मियों में कूड़े में आग लगने से कई किलोमीटर तक धुआँ फैल जाता है, जबकि बरसात में पानी के साथ कूड़ा बहकर सड़कों तक पहुँच जाता है। दूर बनखंडी तक इसके कारण लोग परेशान रहते हैं। यही कारण है कि कूड़ा निस्तारण का यह मुद्दा हर चुनाव में प्रमुख सार्वजनिक मुद्दा बन जाता है।
नगर निगम ने शासन को भेजी अपनी डीपीआर में कूड़े की वास्तविक मात्रा का हवाला देते हुए त्वरित वित्तीय और प्रशासनिक मंजूरी मांगी है। निगम का लक्ष्य है कि कुंभ मेले से पहले गोविंद नगर को पूरी तरह कूड़ा मुक्त किया जाए। चूंकि ऋषिकेश भी कुंभ मेला क्षेत्र का हिस्सा है और हरिद्वार आने वाले कई श्रद्धालु यहाँ रुकते हैं, इसलिए इस क्षेत्र की सफाई और पर्यावरणीय सुरक्षा अत्यधिक महत्वपूर्ण है। निगम का कहना है कि यदि शासन से मंजूरी में देरी होती है, तो वह अपने संसाधनों से भी निस्तारण प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।
इस बीच, लालपानी बीट में निर्माणाधीन कूड़ा निस्तारण प्लांट की धीमी प्रगति नगर निगम के लिए नई चुनौती बन गई है। प्लांट के इस वर्ष दिसंबर या जनवरी में शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन काम धीमा होने के कारण अब तक यह तैयार नहीं हो पाया है। निगम प्लांट निर्माण करने वाली कंपनी को अंतिम नोटिस देने की तैयारी कर रहा है। इस प्लांट में ऋषिकेश, मुनिकीरेती, तपोवन, नरेंद्रनगर और स्वर्गाश्रम जैसे क्षेत्रों का कूड़ा भी डंप होना है, इसलिए इसकी देरी से पूरे क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
पहली डीपीआर, जो करीब 26 करोड़ रुपये की बनी थी, लागत अधिक होने के कारण निगम द्वारा स्वीकार नहीं की गई। इसके बाद दूसरी एजेंसी से कम लागत में नई डीपीआर तैयार कराई गई, जिस पर अब कार्रवाई आगे बढ़ रही है। कुल मिलाकर, गोविंद नगर में कूड़ा निस्तारण का मुद्दा वर्षों पुरानी समस्या का समाधान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने इस बार प्राथमिकता के साथ काम शुरू किया है और उम्मीद है कि कूड़े का यह पहाड़ जल्द ही इतिहास बन जाएगा।





