
All India Institute of Medical Sciences Rishikesh के नाम पर सोशल मीडिया में फर्जी भर्ती विज्ञापन जारी कर युवाओं को ठगने की कोशिश की गई। संस्थान ने स्पष्ट किया कि भर्ती केवल आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही होती है। मामले में साइबर थाने में शिकायत दर्ज कर ठगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
- सोशल मीडिया पर फर्जी भर्ती से युवाओं को ठगा जा रहा
- एम्स ऋषिकेश ने फर्जी विज्ञापन पर कार्रवाई शुरू की
- नौकरी के झांसे में न आएं, एम्स प्रशासन की अपील
- साइबर ठगों का नया तरीका, सरकारी संस्थान के नाम पर धोखा
ऋषिकेश। उत्तराखंड के Rishikesh स्थित All India Institute of Medical Sciences Rishikesh के नाम पर नौकरी दिलाने के बहाने ठगी का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी भर्ती विज्ञापन जारी कर बेरोजगार युवाओं को जाल में फंसाने की कोशिश की जा रही थी। मामला उजागर होने के बाद एम्स प्रशासन सतर्क हो गया है और इस पूरे प्रकरण में कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। संस्थान ने साफ किया है कि एमटीएस, ऑफिस अटेंडेंट और वार्ड अटेंडेंट जैसे पदों पर फिलहाल कोई भर्ती प्रक्रिया नहीं चल रही है और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक विज्ञापन जारी किया गया है।
एम्स प्रशासन के अनुसार, ठगों ने फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी पेज बनाकर भर्ती के नाम पर आवेदन आमंत्रित किए। इससे बेरोजगार युवाओं को भ्रमित कर आर्थिक ठगी का प्रयास किया जा रहा था। संस्थान के उपनिदेशक (प्रशासन) लेफ्टिनेंट कर्नल गोपाल मेहरा ने स्पष्ट किया कि एम्स एक केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थान है और वह भर्ती के लिए केवल अपनी आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करता है। उन्होंने कहा कि संस्थान कभी भी सोशल मीडिया या किसी अन्य अनधिकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से भर्ती विज्ञापन जारी नहीं करता।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि इस साजिश में संस्थान का कोई कर्मचारी भी शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में फर्जी फेसबुक पेज संचालित करने वालों के खिलाफ साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। पुलिस और साइबर टीम मामले की जांच में जुट गई है और आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
एम्स प्रशासन ने युवाओं और आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी भर्ती संबंधी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें। साथ ही, संदिग्ध विज्ञापनों या संदेशों के झांसे में न आएं और किसी भी प्रकार की जानकारी की पुष्टि संस्थान से अवश्य कर लें। यह घटना एक बार फिर साइबर ठगी के बढ़ते खतरे को उजागर करती है, जिसमें ठग सरकारी संस्थानों के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।





