साहित्य लहर
शराबी और सरकार

सुनील कुमार माथुर
देखों शराबी शराब पीकर
कितना मस्तमोला है , कितनी मस्ती में है
न उसे घर परिवार की चिंता हैं और न ही
उसे बीबी बच्चों की चिंता हैं
देखों शराबी शराब पीकर
कितना मस्त मोला है , कितनी मस्ती में है
शराब वह अपने पैसे खरीदता है
शराब पीकर मस्ती में झूमता है
शराबी के लिए सरकार
शराब के ठेके खोलती है
फिर पैसे देकर वह शराब खरीदता है
शराब पीकर वह मस्ती में झूमता है
फिर पुलिस शराबी को शांति भंग के
आरोप में गिरफ्तार करती है
कोर्ट कचहरी में पेश करती है
जमानत होती हैं, पाबंद होता है
सरकार पहले शराब बेचती है
फिर शराबी को पकड कर
उसकी मस्ती छू मंतर करती है
देखों यह कैसी सरकार हैं ?
¤ प्रकाशन परिचय ¤
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From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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Hahahahaha bahut hi satik katax kiya hai aapne is kavita ke madhyam se….
Nice
यहीतो सरकार की नीति है। इससे सरकारकी आमदनी अच्छी होती है और सरकार यही चाहती है की उसकी आमदनी होती रहे। जनता की परवाह किसे है।
Very True
Nice
Bahut sahi
True
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Very nice article 👌
Nice
True