
🌟🌟🌟
फायर ऑडिट में लगातार खामियां मिलने के बाद दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने अब महीने में दो बार फायर सेफ्टी ट्रायल करने का निर्णय लिया है। सोमवार को इमरजेंसी वार्ड में हुए अभ्यास में सुरक्षाकर्मियों और अन्य कर्मचारियों को आग से निपटने की तकनीकें सिखाई गईं।
- फायर सेफ्टी में लापरवाही के बाद दून अस्पताल में बढ़ी सख्ती, हर 15 दिन होगा ट्रायल
- इमरजेंसी में अग्निकांड से निपटने की नई रणनीति, सुरक्षाकर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण
- फायर ऑडिट में फेल होने के बाद जागा प्रशासन, उपकरणों की नियमित जांच शुरू
- दून मेडिकल कॉलेज में फायर ड्रिल की नई व्यवस्था, खराब सिस्टम की तुरंत मरम्मत सुनिश्चित
देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में फायर सेफ्टी को लेकर मिली लगातार चेतावनियों और हालिया ऑडिट में सामने आई गंभीर खामियों ने अब प्रशासन को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। अस्पताल प्रबंधन ने घोषणा की है कि अब फायर सेफ्टी ट्रायल महीने में दो बार अनिवार्य रूप से किए जाएंगे, ताकि किसी भी संभावित अग्निकांड की स्थिति में अस्पताल की तैयारियां मजबूत रहें और उपकरणों की कार्यक्षमता की नियमित जांच हो सके।
इसी क्रम में सोमवार को सुबह 11:30 बजे इमरजेंसी विभाग में विस्तृत फायर सेफ्टी ट्रायल किया गया। इस दौरान 10 सुरक्षाकर्मियों सहित कुल 18 कर्मचारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण में आग लगने पर पानी का प्रेशर कैसे नियंत्रित रखा जाए, पंप के ऑटो मोड को कब और कैसे चालू किया जाए, पाइप में कहीं लीक हो तो तत्काल उपाय क्या हों, और बिजली चले जाने की स्थिति में किन वैकल्पिक प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए—इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से अभ्यास कराया गया। ट्रेनिंग अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर और पिछले हिस्से में आयोजित की गई।
उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एन.एस. बिष्ट के अनुसार, अस्पताल में हर 15 दिन में यह ड्रिल की जाएगी। उनका कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को हर परिस्थिति से निपटने में दक्ष बनाना और साथ ही फायर सेफ्टी उपकरणों की स्थिति को लगातार जांचते रहना है। जहां भी कोई खराबी मिलती है, वहां सुधार कार्य तुरंत किया जाता है ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में कोई तकनीकी बाधा न आए।
अस्पताल प्रबंधन की यह सख्ती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बीते मई में दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल फायर ऑडिट में फेल हो गया था। अग्निशमन विभाग की टीम ने पाया था कि करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद अस्पताल की फायर सेफ्टी प्रणाली सक्रिय ही नहीं थी। इमरजेंसी व ऑपरेशन थिएटर के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि महत्वपूर्ण फायर सेफ्टी ऑटोमैटिक पंप खराब था और फायर वाटर पंप की बैटरी भी काम नहीं कर रही थी। कई अग्निशमन यंत्र भी उस समय खराब मिले थे।
इससे पहले 2024 के ऑडिट में भी ऐसी ही खामियां सामने आई थीं, जिससे अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। लगातार दो साल की इन कमजोरियों ने अस्पताल प्रशासन को मजबूर किया कि अब किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश न रहे। यही कारण है कि नियमित ट्रेनिंग और उपकरणों की लगातार जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
अस्पताल प्रशासन का मानना है कि फायर सेफ्टी ट्रायल की यह नई व्यवस्था न केवल कर्मचारियों की तत्परता बढ़ाएगी, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगी। दून अस्पताल, जो पूरे गढ़वाल क्षेत्र का प्रमुख चिकित्सा केंद्र है, उसकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना समय की मांग बन चुका है, और यही दिशा अब प्रशासन ने दृढ़ता से पकड़ ली है।





