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आज के समय में आवश्यक है “वक्तदान”, कहीं ऐसा न हो कि जब आप वक्त निकालें तब तक बहुत देर हो चुकी हो। याद रखें कि गया वक्त वापस नहीं आता हैं। इसलिए समय की कद्र करना सीखें और अपनों को समय (वक्त) अवश्य ही दीजिए। #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर, राजस्थान
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अभी तक तो हमनें कन्यादान, नेत्रदान, अंगदान, देहदान के बारे मे़ ही सुना था, लेकिन अब समय की पुकार है वक्तदान। वक्तदान शब्द सुनकर आप चौंक गये न। जी हां, यह आज के समय में नितांत आवश्यक है। आज हर कोई कहता है कि उसके पास वक्त नहीं है।
हर कोई बिना काम के बिजी है।
उनके पास किसी की बात सुनने, अपने परिवारजनों को वक्त देने, वृद्ध माता-पिता की सेवा करना, उनके पास बैठकर घर परिवार की समस्याओं पर चर्चा करना, उनके पास बैठकर खाना खाना, गप्प शप्प करने का भी वक़्त नहीं है जबकि वे घंटों बैठकर दूसरों की टांग खिंचाई करते हैं। बेकार की बातें करते हैं।
मोबाइल से चिपके पडे रहते है। लेकिन अपने परिवारजनों के लिए समय नहीं हैं। अगर आपके पास वक्त नहीं है तो क्या कोई दूसरा आकर अपना वक्त देगा। वक्त मिलता नहीं है अपितु अपनों के लिए वक्त निकालना पडता हैं। अब भी वक्त है कि बडे बुजुर्गों, बच्चों व अपनों के लिए वक्त निकालें।
कहीं ऐसा न हो कि जब आप वक्त निकालें तब तक बहुत देर हो चुकी हो। याद रखें कि गया वक्त वापस नहीं आता हैं। इसलिए समय की कद्र करना सीखें और अपनों को समय (वक्त) अवश्य ही दीजिए।
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