
जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम के लिए समय से फायर लाइन निर्माण, मास्टर कंट्रोल रूम स्थापना और जनजागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने और वन क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को वॉलिंटियर के रूप में सक्रिय करने पर बल दिया।
- वनाग्नि संवेदनशील क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश
- युवक और महिला मंगल दलों को वनाग्नि वॉलिंटियर बनाने की पहल
- ग्रीष्मकाल में अस्पतालों में बर्न यूनिट तैनात करने के आदेश
- जनपद के तीनों वन प्रभागों में 61 क्रू स्टेशन किए जाएंगे सक्रिय
रूद्रपुर। जनपद में वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय वनाग्नि प्रबंधन समिति की बैठक की। बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी की जाएं और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।
जिलाधिकारी ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वन क्षेत्रों में समय से फायर लाइन का निर्माण कराया जाए, ताकि आग फैलने से पहले ही उसे नियंत्रित किया जा सके। साथ ही उन्होंने जनपद के तीनों वन प्रभागों में मास्टर कंट्रोल रूम की स्थापना समय पर करने और उनके संपर्क नंबर सार्वजनिक करने के निर्देश दिए, जिससे वनाग्नि से संबंधित सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान हो सके।
Government Advertisement...
उन्होंने कहा कि ब्लॉक एवं ग्राम स्तरीय वनाग्नि सुरक्षा समितियों को पूरी तरह सक्रिय किया जाए और चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास स्थित ग्राम पंचायतों में लोगों को वनाग्नि की रोकथाम, बचाव और त्वरित सूचना देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं। इसके लिए नियमित बैठकें आयोजित करने पर भी जोर दिया गया।
जिलाधिकारी ने वन क्षेत्रों से जुड़े गांवों के युवक और महिला मंगल दलों को सक्रिय करते हुए उन्हें वनाग्नि वॉलिंटियर के रूप में तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि स्थानीय स्तर पर ही आग की घटनाओं पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने वन विभाग, अग्निशमन, पुलिस, राजस्व, शिक्षा सहित अन्य विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने को कहा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि ग्रीष्मकाल के दौरान सभी सरकारी चिकित्सालयों में बर्न यूनिट तैनात रखी जाएं तथा निजी चिकित्सालयों में भी आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए, ताकि आग से प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी यूसी तिवारी ने जानकारी दी कि जनपद के तीनों वन प्रभागों में कुल 61 क्रू स्टेशन स्थापित किए जाते हैं और लगभग 939 नियमित व दैनिक श्रमिक वनाग्नि नियंत्रण कार्यों में तैनात किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि गत वर्ष ग्रीष्मकाल के दौरान जनपद में 1.85 हेक्टेयर वन क्षेत्र वनाग्नि से प्रभावित हुआ था। साथ ही विकासखंड और ग्राम स्तर पर वनाग्नि सुरक्षा समितियों के गठन की जानकारी भी दी गई।
बैठक में अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय, एसीएमओ डॉ. मनोज शर्मा, उप जिलाधिकारी मनीष बिष्ट व गौरव पाण्डेय, जिला विकास अधिकारी सुशील मोहन डोभाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी उमा शंकर नेगी, सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी उप जिलाधिकारी एवं वनाधिकारी भी बैठक से जुड़े।
जिलाधिकारी ने अंत में कहा कि वनाग्नि केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि मानव जीवन, वन्यजीव और आजीविका के लिए भी गंभीर खतरा है, इसलिए इसकी रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और सभी विभाग जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।





